जिले में खत्म हुई साहब नहीं मिले वाली व्यवस्था
फतेहपुर, मो शमशाद । जनपद में अब फरियादियों को अपनी शिकायत लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और न ही उन्हें यह सुनने को मिलेगा कि साहब मीटिंग में हैं, दौरे पर गए हैं या अभी कार्यालय नहीं पहुंचे हैं। जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने जनसुनवाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए ऐसी व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे अब अधिकारियों की जवाबदेही सीधे जनता के सामने तय होगी। नई व्यवस्था के तहत प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक सभी जिला स्तरीय अधिकारियों का अपने कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य कर दिया गया है। इस दौरान जिलाधिकारी कार्यालय में आने वाले शिकायतकर्ताओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे संबंधित अधिकारी से जोड़ा जाएगा। शिकायत सुनने के साथ-साथ अधिकारी को तत्काल जवाब भी देना होगा और
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| डीएम निधि गुप्ता वत्स। |
समस्या के निस्तारण की समयसीमा भी बतानी पड़ेगी। सबसे खास बात यह है कि अब शिकायतकर्ता की मौजूदगी में स्वयं जिलाधिकारी संबंधित अधिकारियों से सवाल करेंगी। यानी अब केवल फरियादी ही नहीं, बल्कि डीएम भी यह जानेंगी कि शिकायत का समाधान क्यों नहीं हुआ और जिम्मेदार अधिकारी ने अब तक क्या कार्रवाई की है। ऐसे में लापरवाही या टालमटोल की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई है। लंबे समय से लोगों की शिकायत रहती थी कि अधिकारी कार्यालयों में नहीं मिलते और एक समस्या के समाधान के लिए कई-कई बार विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद फरियादियों में संतोष का माहौल दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि अब शिकायत सीधे अधिकारी तक पहुंच रही है और जवाब भी मौके पर मिल रहा है। वहीं प्रशासनिक गलियारों में भी इस नई व्यवस्था की चर्चा जोरों पर है। कई अधिकारी इसे जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ के लिए जनसुनवाई के ये दो घंटे किसी परीक्षा से कम नहीं हैं। अब हर शिकायत का रिकॉर्ड रहेगा और हर सवाल का जवाब भी देना होगा। जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स का कहना है कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। किसी भी शिकायत को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहने दिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। जनता का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लगातार प्रभावी ढंग से लागू रही तो साहब नहीं मिले और फाइल चल रही है जैसे बहाने जल्द ही सरकारी दफ्तरों से गायब हो जाएंगे। अब शिकायत ऑनलाइन, निगरानी ऑनलाइन और जवाबदेही भी ऑनलाइन है। ऐसे में साफ है कि जिला प्रशासन ने जनसुनवाई को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सीधे जवाबदेही का माध्यम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।


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