आधुनिक तकनीकों से उद्यमिता के गुर सीख रहे किसान
बांदा, के एस दुबे । बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (एनआईएफ–डीएसटी), भारत सरकार के वित्तपोषण से कृषि अर्थशास्त्र विभाग द्वारा छह दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 20 से 25 जुलाई तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में बांदा और चित्रकूट जनपद के कृषि उद्यमी, किसान, एफपीओ तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेकर आधुनिक कृषि प्रसंस्करण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. जी.एस. पंवार, निदेशक अनुसंधान प्रो. जगन्नाथ पाठक तथा निदेशक प्रशिक्षण एवं नियोजन प्रो. बी.पी. मिश्रा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी
माध्यम है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को अपनाकर स्वरोजगार एवं कृषि आधारित उद्योग स्थापित करने का आह्वान किया।
नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के वैज्ञानिक डॉ. नवनीत ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को छह प्रमुख जमीनी नवाचार मशीनों का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाकर अपने कृषि व्यवसाय को नई दिशा दे सकें।प्रशिक्षण में यमुनानगर (हरियाणा) के खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञ प्रिंस कम्भोज ने बहुउद्देशीय खाद्य प्रसंस्करण मशीन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। वहीं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. प्रतीक शुक्ला, केवीके बांदा की डॉ. प्रज्ञा ओझा एवं डॉ. दीक्षा पटेल, कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ डॉ. शशांक शेखर और डॉ. गजेंद्र सिंह, तथा डॉ. अमित यादव ने विभिन्न तकनीकी विषयों पर किसानों को प्रशिक्षण दिया। कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज, प्रयागराज के कृषि अर्थशास्त्री डॉ. पुनीत कुमार अग्रवाल ने उत्पादों के आर्थिक मूल्यांकन, विपणन एवं उद्यम विकास की जानकारी साझा की। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बहुउद्देशीय खाद्य प्रसंस्करण मशीन से आम और संतरे का जूस, टोमैटो केचप, सॉस, टोमैटो प्यूरी, एलोवेरा जूस, एलोवेरा जेल, एलोवेरा साबुन, हर्बल शैम्पू, गुलाब जल, पपीते का जैम तथा चिली सॉस सहित लगभग 120 प्रकार के मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सब्जी बीज निकालने की मशीन, जैविक खाद निर्माण मशीन और उन्नत दाल मिल जैसी आधुनिक तकनीकों का भी व्यावहारिक अनुभव कराया जा रहा है। परियोजना संचालक डॉ. पुष्पा यादव के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. अभिषेक कालिया, डॉ. पंकज कुमार ओझा एवं डॉ. यश गौतम हैं। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।


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