राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बांदा में 2 महीने में कराए गए 7000 सुरक्षित संस्थागत प्रसव
प्रसूताओं को मिली जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि
जननी सुरक्षा योजना ने मातृ शिशु मृत्यु दर को भी किया कम, एक लाख में 99 महिलाओं की ही होती है मृत्यु
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप बांदा में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मिली नई दिशा
बांदा, के एस दुबे । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में बांदा जिले में जननी सुरक्षा योजना ने मंत्र एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित इस योजना के प्रति लोगों का विश्वास बड़ा है और अब लोग संस्थागत प्रसव करना पसंद कर रहे हैं। जहां पहले लोग घरों में अशिक्षित हाथों में पुरुषों की जिम्मेदारी देते थे और इससे जच्चा बच्चा की मौत हो जाती थी तो वही सरकार की इस पहलवान लगातार प्रयासों के चलते अब लोग संस्थागत परसों पर विश्वास करने लगे हैं और सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरूप अब बांदा में मातृ मृत्यु दर में कमी देखने को मिल रही है।
SRS के आंकड़े के मुताबिक 1 लाख प्रसव में 99 महिलाओं की होती है मौत
संस्थागत प्रसव के मामले में बांदा ने एक नया कीर्तिमान हासिल किया है और SRS के आंकड़े के मुताबिक लाख डिलीवरी में 99 महिलाओं की ही मौत होती है और प्रदेश में बांदा का संस्थागत प्रसव के मामले में छठवां स्थान है। जहां पिछले 1अप्रैल 2026 से 30 जून तक लगभग 7000 संस्थागत प्रसव हुए हैं। वहीं सरकार के लगातार प्रयासों के जरिए अब लोग संस्थागत प्रसव के महत्व को समझने लगे हैं।
संस्थागत प्रसव के प्रति लोग हुए जागरूक
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने का लगातार काम किया जा रहा है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है व लोग जागरुक भी हो रहे हैं। और अब लगभग सभी लोग सरकारी अस्पतालों में ही जाकर डिलीवरी कराना पसंद कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में लगभग 7000 संस्थागत प्रसव कराए गए हैं जो बड़ी उपलब्धि है। बताया कि बांदा में मातृ मृत्यु दर न के बराबर है और SRS के आंकड़े के मुताबिक एक लाख महिलाओं में 99 महिलाओं की ही मौत हुई है जो जनपद के लिए अच्छी बात है। साथ ही बताया की सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव की पूरी व्यवस्थाएं हैं और यहां पर खाने-पीने व रुकने की पूरी व्यवस्थाएं हैं। साथ ही जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपए व शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपए भी दिए जाते हैं। और जहां पहले अशिक्षित हाथों में प्रसव की जिम्मेदारी होती थी। वहीं अब लोग जागरूक हुए हैं और सरकारी अस्पतालों में जाकर प्रसव कराना पसंद कर रहे हैं।


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