चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : धर्मनगरी के घनघोर जंगलों के बीच बटोही धाम में बांस-बल्ली से बनी निःशुल्क आदिवासी पाठशाला में उस समय खुशियों का माहौल छा गया, जब आजमगढ़ निवासी रणजीत सिंह की 6 वर्षीय बेटी आर्या सिंह का जन्मदिन वंचित और असहाय कोल जनजाति के मासूम बच्चों के बीच मनाया गया। शहरों की चकाचैंध और दिखावे से दूर जंगल की शांत वादियों में मना यह जन्मोत्सव भावुक कर देने वाला रहा। आर्या ने अपना जन्मदिन उन बच्चों के साथ मनाने का निर्णय लिया, जिनके जीवन में खुशियों के ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं। पाठशाला के कई बच्चों ने अपनी आंखों के सामने पहली बार किसी का जन्मदिन देखा। जब आर्या ने केक काटा तो बच्चों की आंखों
में उत्सुकता और चेहरे पर मुस्कान साफ झलक रही थी। बच्चों ने तालियों के साथ आर्या को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर जन्मोत्सव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। पाठशाला परिसर में बच्चों ने अपने हाथों से अमरूद, कटहल, नींबू और करौंदा समेत विभिन्न फलदार एवं फूलदार पौधे लगाकर उनकी देखभाल का संकल्प लिया। आयोजकों ने कहा कि जन्मदिन को केवल उत्सव तक सीमित न रखकर यदि इसे किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने और प्रकृति को जीवन देने से जोड़ा जाए, तो इससे बड़ी खुशी कोई नहीं। आर्या का यह जन्मोत्सव इन बच्चों के लिए यादगार बनकर रहेगा और लगाए गए पौधे उनकी यादों को वर्षों तक जीवित रखेंगे। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी बच्चों और ग्रामीणों के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया। उपस्थित लोगों ने संपन्न वर्ग से अपील की कि वे अपने विशेष अवसरोंकृजन्मदिन, विवाह वर्षगांठ आदि को जरूरतमंद बच्चों के साथ साझा करें, जिससे समाज में अपनत्व, सेवा और मानवता की भावना और मजबूत हो।


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