बांदा, के एस दुबे । विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि जनपद बांदा के थाना बदौसा में दिनांक 25 जून 2015 को मु0अ0सं0 74/2015, धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अभियुक्त भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव पुत्र रामआसरे एवं लाला यादव पुत्र भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव, निवासी बरगदहा पुरवा मजरा उतरवा, थाना बदौसा, जनपद बांदा के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
अभियोजन के अनुसार अभियुक्त भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव गिरोह का लीडर था तथा अभियुक्त लाला यादव उसका सक्रिय सदस्य था। अभियुक्तगण अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर अवैध गतिविधियों को अंजाम देते थे तथा आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए अपराध करने के अभ्यस्त थे। अभियोजन के अनुसार गिरोह की गतिविधियों के कारण क्षेत्र में भय एवं आतंक का वातावरण बना हुआ था तथा आमजन एवं सरकारी कर्मचारियों में भी असुरक्षा की भावना व्याप्त थी।
अभियुक्तगण के विरुद्ध दर्ज आधारभूत मुकदमों एवं आपराधिक गतिविधियों के आधार पर गैंगचार्ट तैयार किया गया, जिसे सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित कराया गया। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद अभियुक्तगण के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया गया।
उक्त मुकदमे की विवेचना के दौरान अभियुक्तगण के आपराधिक इतिहास, गैंगचार्ट, एफआईआर, तहरीर, अभियोजन स्वीकृति तथा अन्य अभिलेखीय साक्ष्यों को संकलित किया गया। विवेचना पूर्ण होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
मामले में न्यायालय द्वारा दिनांक 11 नवंबर 2016 को अभियुक्तगण के विरुद्ध आरोप निर्धारित किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 5 मौखिक गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया, जिनमें एफआईआर लेखक, वादी मुकदमा, उपनिरीक्षक एवं तथ्य साक्षी शामिल रहे। इसके अतिरिक्त गैंगचार्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, तहरीर, आरोपपत्र एवं अभियोजन स्वीकृति सहित महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर विधिवत सिद्ध कराए गए।
विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से अभियुक्तगण की गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता प्रमाणित होती है। अभियोजन ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियुक्तगण गिरोह बनाकर अपराधों के माध्यम से आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करने तथा क्षेत्र में भय एवं आतंक का वातावरण उत्पन्न करने के उद्देश्य से आपराधिक गतिविधियां करते थे।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बांदा श्रीपाल सिंह ने दिनांक 18 अगस्त 2026 को दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में अभियुक्त भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव तथा लाला यादव को धारा 3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत 5-5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 6,000-6,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक अभियुक्त को तीन-तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
उक्त मुकदमे में पैरोकार पुष्पेंद्र कुमार, कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य तथा विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह द्वारा प्रभावी पैरवी एवं अभियोजन संबंधी कार्यवाही में समन्वय किया गया। अभियोजन द्वारा साक्षियों का समयबद्ध साक्ष्य कराए जाने तथा उपलब्ध मौखिक एवं अभिलेखीय साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए जाने के परिणामस्वरूप दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप सिद्ध हुए और उन्हें न्यायालय द्वारा सजा सुनाई गई।


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