चित्रकूट ब्यूरो, सुखेन्द्र अग्रहरि : प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय सह संयोजक चंद्रकांत के दो दिवसीय चित्रकूट प्रवास के दौरान भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान परंपरा, शोध, पर्यावरण संरक्षण और ग्राम विकास जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि केवल जन्म से भारतीय होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संस्कृति और जीवन मूल्यों को व्यवहार में उतारना ही वास्तविक भारतीयता है। उन्होंने भारतीय वाङ्मय पर गंभीर शोध और तथ्यपरक अध्ययन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। प्रांत संयोजक मुनीष ने कहा कि समाज में फैलाए जा रहे गलत नैरेटिव का प्रभावी उत्तर केवल शोध आधारित और प्रमाणिक वैचारिक संवाद से ही दिया जा
सकता है। उन्होंने युवाओं से तथ्यपरक अध्ययन और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने का आह्वान किया। कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने नानाजी देशमुख की ग्रामोदय अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि चित्रकूट सामाजिक समरसता और ग्रामीण विकास का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने शिक्षा को समाज निर्माण का प्रमुख आधार बताते हुए इसे ग्राम विकास से जोड़ने पर बल दिया। प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने आनंद कानन में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके साथ ही श्री कामदगिरि पीठम, दीनदयाल शोध संस्थान, जगद्गुरु रामभद्राचार्य राज्य दिव्यांग विश्वविद्यालय और भारत जननी परिसर का भ्रमण कर सेवा, शिक्षा और ग्राम विकास से जुड़े कार्यों का अवलोकन किया। प्रवास के अंतिम चरण में संगठनात्मक विस्तार के तहत संदीप रिछारिया को विभाग प्रचार एवं संपर्क प्रमुख तथा सचिन चतुर्वेदी को बांदा जिला संयोजक के रूप में मनोनीत किया गया।


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