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Thursday, August 13, 2026

चीनी ने छीनी चाय की मिठास, रक्षाबंधन से पहले बढ़े दाम

फतेहपुर, मो शमशाद । रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही बाजार में रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तुओं के दामों पर महंगाई का असर दिखाई देने लगा है। शक्कर के कम उत्पादन और त्योहारों के चलते बढ़ती मांग के बीच पिछले करीब पखवाड़े भर में चीनी के फुटकर दाम में भी प्रति किलो 10 रुपये तक के आसपास का इजाफा हो चुका है। चीनी के अचानक बढ़े दामों ने आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसका असर सबसे ज्यादा उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके लिए चाय और घर में बनने वाले पकवान रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा हैं।


अभी तक फुटकर बाजार में 45 से 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस तरह से देखा जाए तो उपभोक्ताओं को एक किलो चीनी खरीदने के लिए पहले की तुलना में करीब 10 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। रक्षाबंधन से ठीक पहले इसे बाजार में महत्वपूर्ण उछाल के रूप में देखा जा रहा है। रक्षाबंधन पर मिठाई, पकवान और अन्य व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा बाजार से भी बड़ी मात्रा में मिठाई खरीदी जाती है। लिहाजा, चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ना स्वाभाविक है। किराना स्टोर संचालक अनिल गुप्ता का कहना है कि त्योहार की मांग बढ़ने के साथ यदि बाजार में आपूर्ति उसी अनुपात में नहीं रही तो आने वाले दिनों में चीनी के दाम मैं और उछाल आ सकता है। इस उछाल का सीधा असर केवल घरों के बजट पर ही नहीं, बल्कि मिठाई कारोबार पर भी दिखने की आशंका व्यक्त की जा रही है। चीनी महंगी होने पर मिठाइयों की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। त्योहार पर मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं को भी इसका असर कीमतों के रूप में महसूस हो सकता है।

दाम बढ़े तो घट गई खपत

चीनी के बढ़ते दामों का असर बाजार में इसकी खपत पर भी दिखाई देने लगा है। व्यावसायिक नगरी बिंदकी के शक्कर विक्रेता अनिल ओमर के मुताबिक, मौजूदा समय में शक्कर का कारोबार करीब 15 से 20 फीसदी तक घट गया है। उनके अनुसार, पहले जो ग्राहक एक बार में करीब पांच किलो शक्कर खरीद लेते थे, अब वही ग्राहक जरूरत के मुताबिक कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं। बढ़ती कीमतों के बीच उपभोक्ता अब एक साथ अधिक मात्रा में शक्कर खरीदने से बच रहे हैं। कई ग्राहक एक या दो किलो ही खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग आधा किलो से ही काम चला रहे हैं। इससे फुटकर कारोबार पर भी असर पड़ा है।

आम परिवारों के बजट पर असर

चीनी यानी शक्कर, का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। चाय से लेकर मिठाई और विभिन्न घरेलू पकवानों तक इसकी मिठास की जरूरत पड़ती है। इसलिए इसके दाम में बढ़ोतरी से सीधे घरेलू खर्च प्रभावित होता है। खासकर ऐसे समय में जब त्योहारों पर पहले से ही परिवारों के खर्च बढ़ जाते हैं। फिलहाल, चीनी के दाम में 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी अतिरिक्त बोझ बन गई है। एक ओर रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते की मिठास बढ़ाने के लिए लोग मिठाई और अन्य सामान खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाजार में शक्कर की बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी है। उपभोक्ताओं को आशंका है कि यदि त्योहार के दौरान मांग और बढ़ी तो चीनी के दाम में और इजाफा हो सकता है।

चाय से मिठाई तक महंगाई की मार

चीनी के दाम बढ़ने का असर सबसे पहले रोजमर्रा की चाय पर महसूस होता है। घर में दिनभर बनने वाली चाय में चीनी की खपत भले ही कम मात्रा में होती हो, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें महीने के कुल घरेलू खर्च पर असर डालती हैं। वहीं त्योहार के दौरान मिठाई और पकवानों में चीनी की अधिक जरूरत होने से खर्च और बढ़ सकता है। व्यापारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाजार की मांग और आपूर्ति पर चीनी के दाम निर्भर करेंगे। फिलहाल 45 से 50 रुपये किलो से बढ़कर 55 रुपये किलो तक पहुंची चीनी ने उपभोक्ताओं को महंगाई का नया झटका दिया है।


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