भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है। इसमें मध्याह्न व्यापिनी भाद्रपद शुक्ल पंचमी ग्राह्य की जाती है। इस व्रत में सप्तऋषियों की पूजा की जाती है। इस वर्ष पञ्चमी तिथि व्रत 15 सितम्बर को है , पञ्चमी तिथि का प्रारम्भ 15 सितम्बर को प्रात: 07:44 बजे से होगा और पञ्चमी तिथि का समापन 16 सितम्बर को प्रात: 08:59 बजे होगा ऋषि पञ्चमी का पूजा मुहूर्त प्रात:10:47 से दोपहर में 01:15 तक उत्तम है
ऋषि पंचमी का संबंध सप्तऋषियों से है। इस दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि के साथ माता अरुंधती का स्मरण और पूजन किया जाता है। विशेष रूप से महिलाएं इस व्रत को श्रद्धा से करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऋषि पंचमी का व्रत आत्मशुद्धि, संयम और प्रायश्चित का प्रतीक है। इस दिन सप्तऋषियों का स्मरण हमें उनके ज्ञान, तप, त्याग और समाज को दिए योगदान के प्रति सम्मान करना भी सिखाता है मान्यता है कि, इस व्रत से पिछले व वर्तमान जीवन के सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है
--ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ


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