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Friday, September 11, 2026

बाढ़ के पानी ने काटी किसानों की कमर

खेतों में कटान से उपजाऊ जमीन बहने का खतरा

कई गांवों में फसल व कृषि भूमि को भारी नुकसान

किसानों ने सर्वे कराकर आर्थिक सहायता की उठाई मांग

फतेहपुर, मो शमशाद । मलवां विकासखंड की शिवराजपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत मिश्रनखेड़ा, लालखेड़ा, बसंतखेड़ा, दुल्हीखेड़ा समेत कटरी क्षेत्र के कई गांव इन दिनों बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ के तेज बहाव ने जहां किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, वहीं कृषि योग्य भूमि में लगातार हो रहे कटान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई स्थानों पर पानी के तेज बहाव से खेतों के बीच गहरे नाले जैसी स्थिति बन गई है, जिससे उपजाऊ जमीन तेजी से कटकर बह रही है। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी खेतों में कटान का सिलसिला थम नहीं रहा है। तेज धार के चलते खेतों की मेड़ और उपजाऊ मिट्टी बह रही है। इससे न केवल वर्तमान फसल को नुकसान पहुंचा है, बल्कि आने वाले समय में खेती योग्य भूमि के और अधिक कटाव की आशंका

गांव में भरा पानी। 

बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कटान को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी मात्रा में कृषि भूमि बाढ़ की भेंट चढ़ सकती है। किसान वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बाढ़ के तेज बहाव से खेतों में लगातार कटान हो रही है। कई जगह उपजाऊ मिट्टी बह जाने से खेतों का स्वरूप बदल गया है। फसलों को नुकसान होने के साथ ही किसानों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही खेती की लागत और मौसम की मार से परेशान हैं, ऐसे में कृषि भूमि का कट जाना उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शासन से प्रभावित गांवों का तत्काल स्थलीय सर्वे कराकर फसल और कृषि भूमि को हुए नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सर्वे के आधार पर पात्र प्रभावित किसानों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई में उन्हें कुछ राहत मिल सके। साथ ही कटान प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सुरक्षा एवं बचाव के उपाय कराए जाएं, जिससे भविष्य में कृषि भूमि को और अधिक नुकसान से बचाया जा सके।

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