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Monday, September 14, 2026

फायरिंग कर आठ लाख लूटने वाले गैंगस्टरों पर अदालत का प्रहार, तीन को 5-5 साल की सजा

गैंगस्टर एक्ट में कपिल, पुनीत व मन्नू उर्फ महमूद उल्ला दोषसिद्ध,

6-6 हजार रुपये अर्थदंड

बांदा, के एस दुबे । फायरिंग कर आठ लाख रुपये की लूट की वारदात से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में विशेष गैंगस्टर अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है।  विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बांदा श्रीपाल सिंह ने कपिल पुत्र हनुमान दास गुप्ता निवासी ब्योठा, थाना कोतवाली नगर, जनपद बांदा, पुनीत पुत्र स्व. माता प्रसाद निवासी डीएवी कॉलेज के पास, बारी मोहल्ला, थाना कोतवाली नगर, जनपद बांदा तथा मन्नू उर्फ महमूद उल्ला पुत्र स्व. महबूब निवासी हाथीखाना, अलीगंज, थाना कोतवाली नगर, जनपद बांदा को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत दोषसिद्ध करते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास तथा 6-6 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।


 अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक दोषसिद्ध को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। l निर्णय के बाद तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर सजा भुगतने के लिए जिला कारागार, बांदा भेजने के निर्देश दिए गए। मामला थाना कोतवाली नगर, जनपद बांदा के अपराध संख्या 461/2010 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार 5 जनवरी 2010 की रात करीब 10 बजे हरपाल सिंह आहूजा अपने मकान के सौदे के 8 लाख रुपये लेकर कार संख्या यूपी 90 ई 7925 से घर लौट रहे थे। उनके साथ चालक समी सरदार था। घर के पास पहुंचने पर मोटरसाइकिल से आए तीन लोगों ने वाहन को रोककर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के दौरान समी सरदार के दाहिने हाथ में गोली लगी। इसके बाद बदमाश वाहन में रखी आठ लाख रुपये की रकम से भरी प्लास्टिक की बोरी लेकर मोटरसाइकिल से फरार हो गए।

घटना के बाद घायल समी सरदार को अस्पताल ले जाया गया और थाना कोतवाली नगर में सूचना देकर मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान अभियोजन साक्ष्य के अनुसार लूटी गई रकम में से 3 लाख रुपये कपिल की दुकान से बरामद किए गए। घटना से संबंधित अन्य साक्ष्यों को भी विवेचना में संकलित किया गया। मामले में वादी निरीक्षक दयाशंकर सिंह रहे, जबकि विवेचना विवेचक मनोज कुमार कौशिक द्वारा की गई। विवेचना के दौरान अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमे, गैंगचार्ट, एफआईआर, जीडी रपट, अभियोजन स्वीकृति तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों को संकलित किया गया। विवेचना पूर्ण होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन के अनुसार अभियुक्तगण संगठित रूप से गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे और अपराधों के माध्यम से आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करते थे। उनकी गतिविधियों से क्षेत्र में आमजन के बीच भय एवं आतंक का वातावरण उत्पन्न होने का अभियोजन ने आरोप लगाया। अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास एवं आधारभूत मुकदमे के आधार पर गैंगचार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन कराया गया तथा आवश्यक अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने के बाद गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से गैंगचार्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, जीडी कायमीनामा, आरोपपत्र, अभियोजन स्वीकृति तथा आधारभूत मुकदमे से संबंधित अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर विधिवत सिद्ध कराए गए। अभियोजन ने तर्क दिया कि उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से अभियुक्तगण का संगठित गिरोह से संबंध, आपराधिक गतिविधियों में उनकी संलिप्तता तथा अपराधों के माध्यम से आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करने की प्रवृत्ति प्रमाणित होती है। बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्तों को निर्दोष बताते हुए अभियोजन के साक्ष्यों एवं गैंगचार्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए और अदालत से राहत की मांग की गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया।

साक्ष्यों के समग्र परीक्षण के बाद न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने कपिल, पुनीत एवं मन्नू उर्फ महमूद उल्ला के विरुद्ध धारा 3 गैंगस्टर एक्ट का अपराध संदेह से परे साबित कर दिया है। इसके बाद अदालत ने तीनों अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 6-6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक दोषसिद्ध को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों के सजायावी वारंट तैयार कर तत्काल जिला कारागार, बांदा भेजने के निर्देश दिए। पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को विधि के अनुसार सजा में समायोजित करने का भी आदेश दिया गया। मामले में प्रारंभ में पांच अभियुक्तों का उल्लेख था। न्यायालय के आदेश के अनुसार रफत उल्ला तथा श्रीमती जैनब के न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण उनकी पत्रावलियां पूर्व में अलग कर दी गई थीं। वर्तमान निर्णय कपिल, पुनीत एवं मन्नू उर्फ महमूद उल्ला के विरुद्ध विचारण से संबंधित है।

मामले में राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन की पैरवी में पैरोकार अभिलाष यादव, कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य एवं अमित कुमार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। साक्षियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने, आवश्यक अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने तथा अभियोजन की कार्यवाही में समन्वय स्थापित करने में इनकी भूमिका रही। करीब 16 वर्ष पुराने इस मामले में प्रभावी अभियोजन पैरवी, मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के समग्र परीक्षण के बाद अदालत ने तीनों अभियुक्तों को गैंगस्टर एक्ट में दोषसिद्ध कर 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। फैसले के बाद तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया।








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