जीव हत्या को बताया बड़ी बुराई
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : सत्संग के दौरान परम संत बाबा उमाकांत महाराज ने जीव हत्या को बड़ी बुराई बताते हुए लोगों से जीवों पर दया करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस जीव को मनुष्य बना नहीं सकता और जिसकी पीड़ा दूर नहीं कर सकता, उसे मारने का अधिकार भी उसे नहीं है। सभी जीवों में परमात्मा का अंश विद्यमान है, इसलिए किसी भी जीव को कष्ट नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के संतों और महापुरुषों ने जीवों के प्रति दया और करुणा का संदेश दिया है। ईसा मसीह ने भी दयालु बनने की सीख दी। उन्होंने कहा कि जीवों की हत्या करने, उन्हें लाने, मांस पकाने, परोसने और खिलाने वालों पर भी पाप का भाग आता है। इसलिए जीव हत्या से बचना चाहिए।
बाबा उमाकांत ने मानव शरीर को ‘मानव मंदिर’, ‘जिस्मानी मस्जिद’ और ‘टेम्पल ऑफ लिविंग गॉड’ बताते हुए इसे स्वच्छ रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर या गुरुद्वारे में मांस डालने पर पूजा-पाठ नहीं किया जा सकता, तो मानव शरीर रूपी मंदिर में भी मांस डालकर उसे दूषित नहीं करना चाहिए। उन्होंने मांस और अंडे के सेवन से बचने की सलाह देते हुए कहा कि खान-पान की गलत आदतों से शरीर में बीमारियां बढ़ती हैं। आने वाले समय में बड़ी बीमारियों से बचने के लिए शरीर को स्वच्छ और सात्विक रखना जरूरी है।


No comments:
Post a Comment