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Tuesday, September 15, 2026

डीएम-एसडीएम के बाद मंडलायुक्त की चौखट पर पहुंचा मामला

 अदालत में भूमि विवाद, प्रशासनिक आदेश भी बेअसर! अब कमिश्नर ने कहा—कोर्ट के आदेश तक रोको निर्माण

सिकहुला में 50 साल पुरानी जमीन पर कब्जे का विवाद,

बांदा, के एस दुबे । ग्राम सिकहुला, तहसील पैलानी में करीब पांच दशक पुरानी भूमि को लेकर विवाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर होता दिखाई दे रहा है। जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर दीवानी वाद संख्या 206/2026 न्यायालय में लंबित है। इसी बीच शिकायतकर्ता ने विवादित भूमि पर कब्जे और निर्माण की कोशिश का आरोप लगाते हुए पहले जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से शिकायत की। अब मामला मंडलायुक्त अजीत कुमार के समक्ष पहुंचा है। शिकायतकर्ता नाजिम खां पुत्र स्व. सहामत खां निवासी ग्राम सिकहुला के अनुसार, उनके पिता ने करीब 50 वर्ष पूर्व सूरजपाल व कृष्ण पाल सिंह पुत्रगण दिरपाल से उक्त भूमि खरीदी थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि भूमि के एक हिस्से को भविष्य में मकान निर्माण के लिए खाली छोड़ा गया था और वह लंबे समय से उक्त भूमि पर कब्जा एवं उसका उपयोग करते चले आ रहे हैं।



यथास्थिति के निर्देश के बावजूद निर्माण का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि विवाद न्यायालय में पहुंचने के बाद थाना दिवस पर थाना अध्यक्ष और तहसीलदार की ओर से दोनों पक्षों को विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद 8 सितंबर 2026 को क्षेत्राधिकारी पैलानी के मौके पर पहुंचने के बाद विपक्षियों द्वारा उसकी कब्जे वाली भूमि से सामान हटाकर कब्जा करने तथा निर्माण कराने का प्रयास किया गया। इस संबंध में 9 सितंबर को जिलाधिकारी बांदा से शिकायत की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद उपजिलाधिकारी पैलानी की ओर से भी विवादित भूमि पर कब्जा न करने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है।


कमिश्नर ने कोर्ट के आदेश तक निर्माण रोकने को कहा

मंगलवार को शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जानकारी मंडलायुक्त अजीत कुमार को देते हुए हस्तक्षेप की मांग की। शिकायत सुनने के बाद मंडलायुक्त ने कहा कि जब तक न्यायालय से कोई आदेश नहीं आता, तब तक विवादित भूमि पर निर्माण कार्य रोका जाए। अब सवाल यह है कि मंडलायुक्त के निर्देश का जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाई देता है।  मामला न्यायालय में विचाराधीन है और प्रशासनिक स्तर पर भी यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश सामने आ चुके हैं। ऐसे में विवादित भूमि पर किसी भी तरह का निर्माण आगे विवाद को और बढ़ा सकता है। फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और विवादित स्थल पर टिकी हैं। मंडलायुक्त के निर्देश के बाद निर्माण रुकता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।






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