72 किसानों को मिले त्रिपाल, रबी फसल के लिए उन्नत बीज उपलब्ध कराने की तैयारी
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित मानिकपुर क्षेत्र के आदिवासी किसानों की मदद के लिए दीनदयाल शोध संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां ने राहत अभियान तेज कर दिया है। अनुसूचित जनजाति उपयोजना के तहत केंद्र की टीम ने जारो माफी, करौहा और डोंडा माफी समेत प्रभावित गांवों का दौरा कर खेतों में फसल क्षति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अतिवृष्टि और डोंडा माफी में बंधान टूटने से तिल, अरहर, मूंग और उड़द की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह पर धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) करने वाले किसानों की फसल बेहतर स्थिति में मिली, जो संकट के बीच उनके लिए सहारा बनी हुई है। राहत के साथ आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर भी किसानों से चर्चा की गई। किसानों ने सरसों, गेहूं और जौ की बुवाई के लिए उन्नत बीज की मांग रखी। केंद्र ने मांग के अनुसार बीज की किस्म और मात्रा का विवरण
जुटाया, ताकि समय से गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराया जा सके। खुले में रखे अनाज और अस्थायी आशियानों को सुरक्षित रखने के लिए जारो माफी के 48 और करौहा के 24 किसानों सहित कुल 72 किसानों को त्रिपाल वितरित किए गए। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने किसानों को आपदा से न घबराकर स्वावलंबन के साथ खेती दोबारा मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एमएल जाट और उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से फोन पर वार्ता कर प्रभावित किसानों के लिए बीज, तकनीकी सहयोग, मुआवजा और बीमा राशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया। दोनों स्तरों से हरसंभव सहयोग का आश्वासन मिला। राहत अभियान आगे भी प्रभावित गांवों में जारी रहेगा। कार्यक्रम में डीआरआई के सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष बसंत पंडित, केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ राजेन्द्र सिंह नेगी, वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम प्रभारी उत्तम कुमार त्रिपाठी, वैज्ञानिक सतीश पाठक, कार्यकर्ता अभय कुमार, राजन द्विवेदी सहित किसान आदि मौजूद रहे।


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