बबेरू /बाँदा, के एस दुबे । बांदा और फतेहपुर को जोड़ने वाले औगासी यमुना नदी पुल विधानसभा चुनाव 2022 के पहले जिस जल्दबाजी के साथ इस पुल की शुरुआत की गयी थी की , ऐसा लगा मानो प्रशासन को किसी रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज कराना हो। पर कहते हैं ना, जल्दबाजी का काम शैतान का होता है,और यहां तो शैतान के साथ-साथ ठेकेदारों के भी हाथ खूब रंगे नजर आए! पुल पर गड्ढे ऐसे उभरे जैसे सड़क पर कोई खजाना छिपा हो, और उन गड्ढों से झांकती लोहे की सरिएं मानो जनता को चिढ़ा रही हों कि—"देखो, हमारी असलियत बाहर आ रही है!" जिसकी खबर को प्रमुखता के साथ
खबर क्या चली, जिम्मेदारों के पैरों तले जमीन खिसक गई। भ्रष्टाचार की परतें उघड़ीं तो अधिकारियों और ठेकेदारों की नींद उड़ गई। बस फिर क्या था, रातों-रात मरम्मत का ऐसा ड्रामेटिक सीन क्रिएट किया गया कि बड़े-बड़े गड्ढों और सरियों को छुपाने के लिए लीपापोती का महा-अभियान छेड़ दिया गया। ठेकेदार साहब और बाबू लोग शायद यह भूल गए कि गड्ढे तो डामर या सीमेंट से भर जाएंगे, लेकिन इस निर्माण में जो ‘मलाई’ खाई गई है, उसे कौन छिपाएगा, क्षेत्र की आवाम अब एक ही सुर में पूछ रही है की गड्ढे तो भर दोगे, पर इस नायाब भ्रष्टाचार की इबारत लिखने वाले उन इंजीनियरों और ठेकेदारों पर कार्यवाही कब होगी, क्या इस लीपापोती से भ्रष्टाचार छुप जाएगा या जनता के तीखे तेवर इन भ्रष्ट तंत्र की चूलें हिला देंगे?


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