नवरात्र विशेष: माँ दुर्गा के नौ रूप और ‘सड़क सुरक्षा कवच‘- डॉ. उदित नारायण पाण्डेय - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Sunday, October 11, 2026

नवरात्र विशेष: माँ दुर्गा के नौ रूप और ‘सड़क सुरक्षा कवच‘- डॉ. उदित नारायण पाण्डेय

चित्रकूट,  सुखेन्द्र अग्रहरि : भारतवर्ष में नवरात्र केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि चेतना, संयम और सुरक्षा का महापर्व है। इस पावन अवसर पर देश के हर घर में नवदुर्गा की पूजा अत्यंत श्रद्धा के साथ की जाती है। माँ दुर्गा का प्रत्येक स्वरूप, उनकी सवारी और उनके अस्त्र-शस्त्र हमें नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय की प्रेरणा देते हैं। वर्तमान युग में सड़कों पर फैली अनुशासनहीनता, गति का अनियंत्रित सम्मोहन और लापरवाही किसी ‘महिषासुर‘ से कम नहीं हैं, जो हर साल लाखों हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देते हैं। यदि हम माँ दुर्गा के दिव्य स्वरूपों, देवी कवच और पौराणिक कथाओं को सड़क सुरक्षा के व्यावहारिक नियमों से जोड़कर देखें, तो हमारी गृह-पूजा सड़कों पर जीवन बचाने का एक बड़ा माध्यम बन सकती है।



भगवान विश्वकर्मा का अभेद्य कवच: सुरक्षा उपकरणों का महत्व

श्री दुर्गा सप्तशती के द्वितीय अध्याय में वर्णन आता है कि जब महिषासुर के वध के लिए सभी देवताओं ने अपने तेज से देवी को प्रकट किया, तब देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने माँ दुर्गा को अभेद्य कवच और अस्त्र प्रदान किए ताकि युद्ध भूमि में वे पूर्णतः सुरक्षित रहें।

शास्त्रोक्त उद्धरण (श्री दुर्गा सप्तशती - द्वितीय अध्याय): ‘‘विश्वकर्मा ददौ तस्यै परशुं चातिनिर्मलम्। अस्त्राण्यनेकरूपाणि चामृतं कवचमभेद्यम्॥‘‘

सरल व्याख्या: देवशिल्पी विश्वकर्मा ने माँ भगवती को एक अत्यंत निर्मल फरसा, अनेक प्रकार के अस्त्र और कभी न भेदा जा सकने वाला ‘अभेद्य कवच‘ प्रदान किया।

आज के तकनीकी युग में जब हम वाहन लेकर सड़क रूपी समर में उतरते हैं, तो हमारा ‘अभैद्य कवच‘ विज्ञान और शिल्पकला द्वारा निर्मित आईएसआई मार्क हेलमेट, कार की सीट बेल्ट और एयरबैग हैं। दुपहिया चलाते समय हेलमेट पहनना और कार में बैठते ही सीट बेल्ट लगाना माँ के उसी दिव्य कवच को धारण करने जैसा है, जो दुर्घटना के समय यमराज के प्रहार को भी विफल कर देता है।


‘देवी कवच‘ की सरल व्याख्या और हमारी यात्रा सुरक्षा

दुर्गा सप्तशती का ‘देवी कवच‘ वस्तुत: मानव शरीर और जीवन की चौतरफा रक्षा का एक सुरक्षा-मैनुअल है। इसमें ऋषि मार्कण्डेय पूछते हैं कि संसार में ऐसा कौन सा उपाय है जिससे मनुष्य की सब संकटों से रक्षा हो? तब ब्रह्मा जी उन्हें ‘देवी कवच‘ बताते हैं।

शास्त्रोक्त उद्धरण (देवी कवच - श्लोक ५३): ‘‘प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता। दक्षिणेऽवतु वाराही नैरृत्यां खड्गधारिणी॥‘‘

सरल व्याख्याः इस मंत्र में प्रार्थना की गई है कि पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और दसों दिशाओं से देवशक्तियां मेरी रक्षा करें।

सड़क पर चलते समय ‘दसों दिशाओं से रक्षा‘ तभी संभव है जब हमारी आँखें और कान चारों तरफ सजग हों। गाड़ी चलाते समय रियर-व्यू मिरर (पीछे देखने का शीशा), साइड मिरर्स और सड़क पर लगे यातायात संकेतक ही हमारी दसों दिशाओं के प्रहरी हैं। अपनी लेन में चलना और मोड़ों पर इंडिकेटर देना ही असल मायने में ‘दिशाओं की सुरक्षा‘ सुनिश्चित करना है।


माँ की सवारी ‘सिंह‘ः शक्ति पर नियंत्रण और संयम का पाठ

माँ दुर्गा की सवारी ‘सिंह’ (शेर) है, जो अदम्य ऊर्जा, अपार शक्ति और आक्रामकता का प्रतीक है, लेकिन माँ उस हिंसक सिंह पर अत्यंत शांत और पूर्ण नियंत्रण के साथ विराजमान हैं। ऽ आज की गाड़ियों के आधुनिक इंजन भी उसी सिंह की तरह शक्तिशाली (हॉर्सपावर) हैं। यदि चालक का उस पर नियंत्रण न हो, तो वह विनाश का कारण बनता है। सूनी सड़क या एक्सप्रेस-वे देखकर गाड़ी की रफ्तार को बेकाबू न होने देना, बल्कि गति सीमा के भीतर रखना ही सिंह पर नियंत्रण है।


घर-घर पूजित ‘नवदुर्गा‘ के स्वरूपों से सड़क सुरक्षा की नौ सीखें

माँ शैलपुत्री: स्थिरता और अडिगता, धैर्य रखना: घर से समय पर निकलें ताकि सड़क पर जल्दबाजी या आपाधापी न करनी पड़े।

माँ ब्रह्मचारिणी: नियम और घोर तप, अनुशासन: ट्रैफिक लाइट (लाल बत्ती) न लांघना और हमेशा ट्रैफिक नियमों का तप की तरह पालन करना।

माँ चंद्रघंटा: सतर्कता और ध्वनि, नो हॉर्निंग: अनावश्यक हॉर्न बजाकर ध्वनि प्रदूषण न फैलाना और एम्बुलेंस को तुरंत रास्ता देना।

माँ कुष्मांडा: मंद मुस्कान और सहनशीलता, रोड रेज से मुक्ति: सड़क पर किसी की गलती पर गुस्सा करने के बजाय संयम से काम लेना।

माँ स्कंदमाता: वात्सल्य और सुरक्षा, बाल सुरक्षा: बच्चों को हमेशा कार की पिछली सीट पर बैठाना और दुपहिया पर उन्हें भी हेलमेट पहनाना।

माँ कात्यायनी: दुष्ट प्रवृत्तियों का संहार, नशे से दूरी: शराब पीकर गाड़ी चलाने जैसी आत्मघाती आदत का समूल नाश करना।

माँ कालरात्रि : अंधकार का नाश, रात्रिकालीन सतर्कता: रात या कोहरे में हाई-बीम की जगह डिपर और फॉग लाइट्स का प्रयोग करना।

माँ महागौरी: पवित्रता और शुचिता, वाहन की फिटनेस: अपने वाहन का प्रदूषण नियंत्रण में रखना और खिड़की से सड़क पर कचरा न फेंकना।

माँ सिद्धिदात्री: सर्व-सिद्धि और पूर्णता, सुरक्षित गंतव्य: जब आप सुरक्षित घर लौटते हैं, तभी आपकी यात्रा सिद्ध और पूर्ण मानी जाती है।


इस नवरात्र लें ‘जीवन रक्षा‘ का महाप्रसाद

नवरात्र में हम जो उपवास रखते हैं, वह हमारी इंद्रियों के संयम का प्रतीक है। यही संयम हमें सड़क पर भी दिखाना है। घर-घर में जलने वाली अखंड ज्योति हमें यह संदेश देती है कि हमारे जीवन की ज्योति भी अखंड रहनी चाहिए, जो केवल हमारी एक छोटी सी लापरवाही (जैसे मोबाइल पर बात करना या बिना हेलमेट गाड़ी चलाना) से बुझ सकती है।

आइए, इस वर्ष की नवरात्र पूजा में माँ दुर्गा के चरणों में एक और संकल्प अर्पित करेंः ‘‘मैं यातायात के नियमों का पूर्ण निष्ठा से पालन करूँगा, क्योंकि जीवन अनमोल है और माँ कभी नहीं चाहतीं कि उनका कोई भी भक्त असुरक्षित घर लौटे।‘‘

विश्वकर्मा द्वारा प्रदत्त अभेद्य कवच: आईएसआई मार्क हेलमेट और सीट बेल्ट पहनें, दुर्घटना में गंभीर व जानलेवा चोटों से पूर्ण बचाव।

देवी कवच का दसों दिशाओं का पहरा: मिरर्स का सही इस्तेमाल और ट्रैफिक इंडिकेटर्स, ब्लाइंड स्पॉट्स और अचानक होने वाली टक्करों पर रोक।

सिंह (सवारी) पर पूर्ण नियंत्रण: निर्धारित गति सीमा का सदा पालन, आपात स्थिति में वाहन को नियंत्रित करने में आसानी। 

महिषासुर के भटकाव का अंत: ड्राइविंग के दौरान मोबाइल और नशे का पूर्ण त्याग, ध्यान केंद्रित रहने से ‘शून्य दुर्घटना‘ के लक्ष्य की प्राप्ति।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages