चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : संवत् 1607 में माघ की कृष्ण पक्ष मौनी अमावस्या को गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण के दर्शन हुए। धर्मगनरी स्थित तोतामुखी हनुमान मंदिर के महंत मोहित दास ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास को आज से 474 वर्ष पहले प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण के दर्शन हुए थे। बनारस में तुलसी दास की प्रेत राज से मुलाकात हुई, तो प्रेत ने बनारस में हनुमान जी से मिलाया। हनुमान जी ने चित्रकूट के लिए कहा कि वहां प्रभु के दर्शन होंगे। हनुमान जी के आज्ञा से तुलसीदास चित्रकूट आए और मां मन्दाकिनी के किनारे रामघाट पर मिट्टी की कगार में छोटी सी गुफा बना कर अखंड ज्योति जला कर तपस्या करने लगे और प्रतिदिन कामदगिरि की परिक्रमा लगाने लगे। एक बार तुलसीदास को कामदगिरि में भगवान राजकुमार के भेष में मिले तो वह पहचान नहीं पाए। हनुमान जी के बताने पर तुलसीदास को पता चला कि राजकुमार ही प्रभु श्रीराम है। जिसके बाद हनुमान जी ने कहा कि उन्हें प्रभु के दर्शन अवश्य होगे। जिसके बाद संवत् 1607 दिन बुधवार माघ की मौनी अमावस्या को तुलसी दास रामघाट में चंदन घिस रहे थे। इस दौरान संतो की भीड़ में सुंदर बालक के रूप में प्रभु श्रीराम और
लक्ष्मण धनुष बाण लिए आए और उनसे तिलक लगाने का आग्रह किया। तिलक लगाने के दौरान हनुमान जी ने तोते के रूप में प्रगट होकर तुलसी दास को ’चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर, तुलसी दास चंदन घिसे तिलक देत रघुवीर’’ दोहा सुनाया। इस दोहे को सुन कर तुलसी दास जी ने प्रभु के चरणों को पकड़ लिया और रोने लगे, तब उसी समय प्रभु ने उठा कर हृदय से लगा लिया अपने विराट रूप के दर्शन कराए। जिसके बाद से आज भी इस स्थान में गोस्वामी तुलसीदास जी के चंदन घिसने का पत्थर, 474 वर्ष से जल रही अखंड ज्योत, तुलसी दास जी की चरण पादुका विशेष दर्शन विश्व के एक मात्र दर्शन तोते रुप में विराजे हनुमान जी दर्शन के लिए दूर दूर भक्त आते है। वृंदावन से पधारे संत शिरोमणि राम दास की अध्यक्षता में प्रति वर्ष चित्रकूट के सभी संत महंत नगरवासी मिल कर इस अवसर को तुलसी रघुवीर दर्शन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जिस में सात दिवसीय 200 संतो द्वारा रामचरित मानस का पाठ नित्य भंडारा 18 जनवरी अमावस्या को भगवान तिलक लगाते हुए तुलसी दास चंदन घिसते की सुंदर झांकी का दर्शन भव्य श्रृंगार विशाल भंडारा महा आरती होती है।
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