हमीरपुर, महेश अवस्थी । प्रतिमा और प्रतिरोध की प्रतीक प्रीती लता वादेदार की पुण्य तिथि पर केबी शिवहरे महाविद्यालय सिसोलर में प्राचार्य डा0 भवानीदीन ने कहा कि देश में अनेक विरांगनायें हुईं। उनमें प्रीतीलता का अलग महत्व है जिसे नकारा नहीं जा सका। क्योंकि 21 साल की उम्र में आजादी के संघर्ष में उन्होंने अपने
आपको न्यौछावर कर दिया था। उनका जन्म बंगलादेश के चटगांव में हुआ था। पिता नगर पालिका में क्लर्क थे। प्रीतीलता ने जो पढ़ना शुरू किया तो वह कोलकता आई और यहां ब्रिटीश अधिकारियों ने उसकी डिग्री रोक दी। उन्हें 80 वर्ष बार मरणोपरान्त यह डिग्री दी गई। स्कूली जीवन में बालचर्य संस्था की सदस्य बनकर उसने अपना एक गु्रप तैयार कर लिया था जो बाद में क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आया। उधर प्राईमरी पाठशाला में उसकी नौकरी लग गई। सूर्यसेन की इण्डियन रिपब्लिक आर्मी में वह महिला सैनिक बनी। 1930 में 2 शस्त्रागार में लूटने की मुल्जिम बनी। चटगांव बिद्रोह में 65 क्रान्तिकारी शामिल हुये थे। उनमें प्रीतीलता भी शामिल थी। कार्यक्रम में आरपी गुप्ता, नेहा यादव, अखिलेश सोनी, आलोक कुमार, प्रदीप यादव, सुरेश कुमार ने भी विचार रखे। संचालन रमाकान्त पाल कर रहे थे।


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