उत्कर्ष मिल्क प्रोडक्ट का भ्रमण
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। ग्रामोदय विश्व विद्यालय के पशु पालन एवं दुग्ध विज्ञान के छात्रों ने व्यावसायिक शिक्षा के उद्देश्य से उत्कर्ष मिल्क प्रोडक्ट चित्रकूट का भ्रमण किया है।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्व विद्यालय के कुलपति नरेश चंद गौतम के निर्देशानुसार भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत कृषि संकाय में पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान विभाग तथा उत्कर्ष मिल्क प्रोडक्ट चित्रकूट के संयुक्त तत्वावधान में बीएससी कृषि एवं एमएससी पशुपालन विभाग के एक
सैकड़ा से अधिक विद्यार्थियों ने दूध से बने पदार्थ छेना तथा पनीर, दूध की गुणवत्ता को जांचने परखने के लिए लेक्टोमीटर, गर्बर विधि से दूध में वसा की उपस्थिति जानने को परीक्षण करने की तकनीक को विस्तारपूर्वक समझा। इससे विद्यार्थियों में व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से दूध से बने उत्पादों से पशुपालकों की आय वृद्धि सुनिश्चित हो सके। परंपरागत कृषि आय के संसाधनों के साथ ही डेयरी उत्पादन इकाई भी आय वृद्धि का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान कैसे करता है यह विद्यार्थियों ने समझा। पशुपालन विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ उमेश शुक्ला ने व्यावसायिक शिक्षा एक रोजगार परक शिक्षा का मार्ग प्रशस्त करने को पशुपालन के विद्यार्थियों के साथ ही चित्रकूट के ग्रामीणों को डेयरी की अपार संभावनाओं को देखते हुए उत्कर्ष मिल्क प्रोडक्ट के साथ नियमित रूप से सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक कार्य करने की सहमति व्यक्त की तथा दूध देने वाली गायों को विशेष रूप से साहिवाल, सिंधी, गिर तथा देवनी जैसी नस्ल को पालने की आवश्यकता है। उत्कर्ष मिल्क प्रोडक्ट के निर्देशक चंद्रदत्त शुक्ला ने बताया कि लैक्टोमीटर द्वारा दूध की शुद्धता तथा गुणवत्ता के आधार पर ग्वालों से दूध क्रय किया जाता है। जिसमें मिलावटी दूध की संभावना कम होती है और दूध से निर्मित उत्पाद की शुद्ध एवं गुणवत्ता बनी रहती है। वर्तमान समय में प्रतिदिन लगभग 250 सौ लीटर दूध जो कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से ग्वाले एकत्र कर इकाई में लाते हैं। दूध से उत्पाद एवं उसके सह उत्पाद बनाते हैं। कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ डीपी राय ने व्यावसायिक शिक्षा का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर पशुपालन विभाग के व्याख्याता श्रीकांत समेत छात्र-छात्राएं दीपक, ऋषभ, अभिषेक, रूपराम, पूनम शर्मा, मानसी पटेल, तृप्ति, शिखा, शीतल, आरती आदि उपस्थित रहे।


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