सामान्य से 50 मीमी0 अधिक बारिश
हमीरपुर, महेश अवस्थी । बाढ़ के बाद बारिश ने तबाही मचा दी है। जिले में अब तक 740 मिलीमीटर वर्षा हुई है जो अपने आप में रिकार्ड है। जो सामान्य से 55 मिलीमीटर अधिक है। इस बारिश के कारण खरीफ की फसल पूरी तरह से चैपट हो गई। तिली, मंूग, उरद, अरहर की फसलें जमींदोज हो गई हैं। वहीं कच्चे मकान गिरे हैं। जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा है। लोगों के पास खाने को अन्य नहीं है और न ही रहने के लिये ठिकाना है। बाढ़ से जहां 90 से अधिक गांव प्रभावित हुये थे। वहीं बारिश से हर गांव की फसल चैपट हुई है। सात दिनों की बारिश ने किसानों को डुबो दिया है। उनके सामने बैंक व रिश्तेदारों को कर्ज को चुकाने की समस्या आ खड़ी है। बीते साल
की तुलना में इस साल दोगुने क्षेत्रफल में खरीफ की फसल बोई गई थी। यनि की 152516 हे0 में खरीफ की फसल थी। जिला कृषि अधिकारी डा0 सरस कुमार तिवारी का कहना है कि सर्वे कार्य चल रहा है। कितने क्षेत्र की फसल नष्ट हुई है। इसका पता तो रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। एडीएम विनय प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि बारिश और बाढ़ से प्रभावित फसलों के सर्वे के लिये निर्देश दिये गये है। फसल बीमा कराने वाले किसान फसल क्षति का कृषि विभाग में आवेदन दे सकते हैं। देवीय आपदा के तहत राहत दिलाने के प्रयास किये जायेंगे। बारिश के कारण सुमेरपुर में तीन कच्चे मकान गिरे हैं। वहीं बांक गांव में एक घर धरासाई हुआ है। चांदथोक निवासी बिन्दादीन, दातादीन, राजनारायण और अरविन्द का सामान भी दब गया है। उनके सामने रहने की समस्या है। मौदहा कुम्हरौड़ा में हीरालाल,, संतोष कुमार, कल्लू प्रजापति का मकान लगातार बारिश के कारण भरभरा कर गिर गया है। मलबे में गृहस्थी का सारा सामान दब गया है। पीड़ितों का लाखों का नुकसान हो गया है। उधर मौदहा के गुरदहा गांव में श्याम नाले के रपटे पर एक मीटर से ऊंचाई में पानी बहने से आवागमन की समस्या पैदा हो गई है। यही हाल पढ़ोरी गांव में है। जहां तहसील और जिला मुख्यालय आने-जाने का रास्ता प्रभावित है। राठ तहसील के जरिया थाने के अमंूद गांव निवासी किसान जयनारायण राजपूत 43 वर्ष के पास 15 बीघा जमीन थी। फसल नष्ट होने से किसान ने फांसी लगाकर आत्यहत्या कर ली है।


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