ग्राम प्रधान और सचिव की मनमानी से हो रहा गड़बड़झाला
बांदा, कृपाशंकर दुबे । केंद्र की मोदी और सूबे की योगी सरकार को ठेंगा दिखाते हुए कुछ सरकारी नुमाइंदे भ्रष्टाचार खात्मे के दावे को पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। कभी आवास के नाम पर तो कभी शौचालय व पेंशन एवं सरकारी योजनाओं के नाम पर अवैध धन उगाही की शिकायत आम बात हो गई है। सरकार का कब्जा मुक्त अभियान भी दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। सरकारी तालाबों पर दबंगों का कब्जा तो कहीं चारागाह की भूमि पर कब्जा, यह सब अधिकारियों के संरक्षण में ही फल-फूल रहा है।
बताते चलें कि पीने के स्वच्छ पानी की तो पूरे क्षेत्र में ही नहीं बल्कि जनपद में पीने के पानी की बड़ी किल्लत है। कहीं-कहीं घरों में लगे नलों ने तो पानी देना बंद कर दिया है, जिसमें बरसात के समय कुछ गनीमत है तो कहीं-
कहीं नल दूषित पानी उगल रहे हैं। कई गांव में सिर्फ और सिर्फ एक ट्यूबवेल और कहीं-कहीं एक सिर्फ और सिर्फ सरकारी नलों पर ही गांव वाले निर्भर है। लेकिन अधिकतर सरकारी नल खराब पड़े हैं तो कहीं दूषित पानी उगल रहे हैं, आखिरकार परेशान ग्रामीण क्या करें।
बबेरू तहसील की लगभग हर ग्राम पंचायत में सरकारी हैंडपंपों का रिबोर हुआ है। लेकिन यह रिबोर कहीं-कहीं सिर्फ और सिर्फ कागजों में ही रिबोर बनकर रह गया है। हो भी क्यों ना क्योंकि कुछ ग्रामीण व समाजसेवी पीसी पटेल जनसेवक (भदेहदू) बताते हैं कि सरकारी हैंडपंपों की कीमत लगभग 25 हजार होगी। लेकिन सरकार द्वारा ग्राम प्रधान को सरकारी हैंडपंप रिबोर कराने के लिए एक बड़ी किश्त 32 हजार से 36 हजार तक दे रही है, तो फायदा तो रिबोर कराने में है। ग्रामीणों की मानें तो यह प्रधान और सचिव मिलकर फर्जी रिबोर कराकर सरकारी धन का बंदरबांट करते हैं। समाजसेवी पीसी पटेल (भदेहदू) ने बताया कि उनके गांव में कई हैंडपंपों को रीबोर दिखाकर उनकी धनराशि हड़प ली गई है। जबकि मौके पर नलों का रिबोर नहीं हुआ है। उन्होंने कई बार विकास खंड अधिकारी एवं सचिव से शिकायत की लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जब ग्रामीणों ने समाजसेवी पीसी पटेल जनसेवक व समाजसेवी अरुण कुमार पटेल (कोर्राखुर्द) की अगुवाई में धरना प्रदर्शन को तैयार हुए, तब जाकर आनन-फानन में ग्राम प्रधान ने मशीन बुलाकर रीबोर करवाने का कार्य प्रारंभ करवाया।


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