देवेश प्रताप सिंह राठौर
(स्वतंत्र पत्रकार)
.........................अंधविश्वास खोखली मान्यताओं का पिछलग्गू न बनें बल्कि खुल कर इन रूढ़ीवादी परंपराओं का दमन करें. क्योंकि आज ही बहुत से संस्थान ऐसे हैं जहां पर लकीर के फकीर अंधविश्वास के ऊपर कार्य किया जाता है।ढकोसलों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें खारिज करें.एक पुरानी कहावत है, ‘लकीर का फकीर बनना’ यानी कहेसुने को गांठ बांध लेना और आंख मूंद कर एक ही ढर्रे पर चलते जाना. यदि घर में धार्मिक मान्यताओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है ,तो घर के बच्चे भी इस में शामिल हो जाते हैं और आंखें मूंदे वही सब करते हैं, जो उन्हें कहा जाता है.। यही हाल काला कानून मैंने बहुत से प्राइवेट संस्थानों में देखा है जो सबसे नीचे वाला अधिकारी लिख देता है वहीं पर लकीर के फकीर की तरह अंधविश्वास आंख मूंदकर निर्णय देना शुरू हो जाता है। आज देश विकास के प्रगति पर है हर व्यक्ति का स्वाभिमान और इज्जत है चाहे छोटा व्यक्त हो चाहे बड़ा सबका अपने जीने का तरीका है ,पर कुछ लोग जो अंधविश्वास के कार्य करते हैं आंख मूंदकर वही लोग आज वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष सबसे चहते माने जाते हैं। क्योंकि उच्च पद का उन्हें बैठा लेने का काम लकीर के फकीर की तरह उनके चाहते चापलूस वालों का कार्य होता रहता है। और उन्हें उच्च पद पर बैठा दिया जाता है। यह प्रथा किसी भी समाज या घर परिवार के लिए अच्छी नहीं होती है उस पर चिंतन करना चाहिए क्या नीचे से लेकर ऊपर तक किस तरह की व्यवस्थाएं हैं किस तरह का पक्ष विपक्ष रखने वाले लोग जानते हुए भी सत्य क्या है ,डर भय के कारण कह नहीं सकते लकीर के फकीर बने हुए हैं वह उनकी मजबूरी है क्योंकि बच्चों को पालना है रोजी रोटी का सवाल है वह अपने सिद्धांतों को बदल देते हैं और लकीर के फकीर के साथ हो जाते हैं। कुछ लोग अन्याय के प्रति लड़ते हैं उन्हें हाशिए पर रखा जाता है और उनकी कदर कोई नहीं करता क्योंकि नीचे से लेकर ऊपर तक सब लकीर के फकीर अंधविश्वासी लोग बैठे हैं जो अंधा कानून को गलत को सही बनाने की स्थित में परपक्या है। बहुत से संस्थानों में शिक्षा का महत्व होता है लेकिन कुछ संस्थान ऐसे हैं जहां का मानक चमचागिरी चापलूसी मुख्य उनका कार्य होता हैऔर इमानदारी का चोला ओढ़े हुए सबसे भ्रष्ट लोग आज बड़े बड़े पदों पर बैठे हैं ,और उन्हीं के द्वारा नीचे स्तर के अधिकारी भी उनके चमचे सिपहसालार लकीर के फकीर वाले ही बैठे हैं। यह भ्रष्टाचारी है कभी दूर नहीं होगी क्योंकि भ्रष्ट ही आज का श्रेष्ठ व्यक्ति का दर्जा प्राप्त है, और पद शोहरत सम्मान मिल रहा है। मैंने हमेशा भ्रष्टाचारी, शिक्षा और चिकित्सा मैं कुरीतियों के संबंध में हजारों लेख लिखे हैं 20 साल से मैंने भ्रष्टाचारी के ऊपर फोकस किया है । परंतु आज की सरकार प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री माननीय योगी जी बहुत कुछ बदलाव किया है पर इतनी ज्यादा आजादी के बाद 65 साल जो भ्रष्टाचारी चली है वह कैसे 6 साल में दूर हो सकेगी, आज देश मजबूत है परंतु उस संस्थाओं में लकीर का फकीर का अंधविश्वासी कानून जो चल रहा है उस पर कभी ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि कर्म प्रधान को कम सफलता मिलती है अधर्मी कुकर्मी ,भ्रष्ट अत्याचारी ,अशिक्षित आज उन संस्थानों में बड़े-बड़े पदों पर बैठे हैं उन से न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है चीन का पूरा जीवन इन छे चीजों में लिप्त है लेकिन बहुत से लोग अच्छे हैं जो उस संस्था के अभिभावक हैं देश में कोई भी संस्थान हो। लेकिन उस संस्था के अभिभावक आज भी न्याय प्रिय हैं परंतु हां तक कोई बात पहुंच ही नहीं पाती है सिर्फ चार जगह जो सिस्टम बना है उन चारों जगह घूम कर लौटकर सिर्फ एक निष्कर्ष निकलता है शिकायतकर्ता ही दोषी बना दिया जाता है और उसे दंड प्राप्त होता है यह सब वरना ऊपर कर अभिभावक तक नहीं पहुंच पाती हैं। देशराज भ्रष्टाचारी से मुक्त होने की स्थिति में है परंतु विपक्ष के लोग आज देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी जी जो विकास पुरुष है उन्हें वह लोग विपक्ष के लोग कांग्रेश के राहुल गांधी जी उन्हें यही पता नहीं होता हम क्या बोल रहे हैं उन जैसे नेता जो विरासत में पाए हुए हैं उनका अस्तित्व कुछ नहीं है विरासत से मिली कांग्रेस पार्टी है आज उसकी हकीकत देखी जा सकती है चाहे देश हित की बात हो चाहे किसी मसले पर बात उठाई जाए कांग्रेश के राहुल गांधी और सोनिया गांधी सिर्फ सरकार का विरोध करना उनका मुख्य मकसद होता है जबकि महाराष्ट्र के कांग्रेस पार्टी से अलग हुए शरद पवार देश हित की बात जानती है वहां पर सरकार का साथ देते हैं जबकि महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी कांग्रेश राहुल की पार्टी शिवसेना के मुख्यमंत्री इन दोनों के समर्थन से आज बैठे हुए हैं लेकिन राष्ट्र हित की बात में शरद पवार सरकार का साथ देते हैं वहीं पर राहुल गांधी गलत बयानबाजी करते हैं।


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