मुख्यमंत्री के निर्देशों को बताया ठेंगा
नीमच/मनासा/जावद, अंकित जैन । भोपाल से प्रदेश के सब जिलों में बजट आवंटन भेजकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा रक्षाबंधन पर्व के पहले शिक्षा विभाग के शिक्षकों को बकाया 3 माह के वेतन भुगतान के निर्देश जारी किए गए थे लेकिन जिले के निरंकुश और स्वेच्छाचारी अधिकारी-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के निर्देशों को ठेंगा बताकर बजट आवंटन प्राप्त करने के बाद भी शिक्षकों को मई, जून और जुलाई 3 महीने के बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया है जिससे शिक्षकों में गहरा आक्रोश व्याप्त हो रहा है।बताया जा रहा है कि जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का अपने मातहतों पर नियंत्रण नहीं होने का खामियाजा आर्थिक प्रताड़ना के रूप में भुगतना पड़ रहा है।सूत्र बताते हैं कि विकासखंड शिक्षा कार्यालयों में बरसों से जमे बाबू बिना लिए-दिए रूटीन के काम भी नहीं कर रहे हैं जिससे सम्बन्धित शिक्षकगण अपने ही अधिकार से वंचित होकर स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।पीड़ित शिक्षकों ने 'मालवदर्शन' को बताया कि जिले के शिक्षा विभाग की यही स्थिति रही तो अब बहुत जल्दी ही समय पर वेतन भुगतान को लेकर म.प्र. उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी क्योंकि कई बार वेतन भुगतान के मामले में जिम्मेदारों की लेट-लतीफी और लापरवाही उजागर हो चुकी है।पीड़ितों ने बताया कि पिछले 1 साल से कभी संकुल के बाबू की तो कभी आहरण-संवितरण अधिकारी के कार्यालय के बाबुओं द्वारा निर्धारित समय पर अपने कर्तव्य का पालन नहीं किए जाने की वजह से वेतन भुगतान करने में देरी होने की बात सामने आई हैं लेकिन इतना सब कुछ होते हुए भी जिला प्रशासन ने भी अभी तक शिक्षा विभाग की कारगुजारियों को नजरअंदाज किया है इसके चलते मक्कारों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और पीड़ितों की परेशानियाँ दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है।उल्लेखनीय है कि बकाया वेतन भुगतान को लेकर 15 दिन पहले भी जिला-स्तर पर शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपा था जिस पर आश्वासन दिया गया था कि बजट आवंटन मिलते ही भुगतान किया जाएगा परन्तु आवंटन के साथ ही मिले मुख्यमंत्री के निर्देश को भी शिक्षा विभाग ने ठेंगा दिखाकर जिला प्रशासन को भी चुनौती देने का काम किया है इसलिए अब ज्ञापन-आवेदन-निवेदन के बाद भी सुनवाई नहीं होने की वजह से पीड़ित शिक्षक न्यायालय के दरवाजे की ओर रुख कर सकते हैं यदि ऐसा हुआ तो नीमच जिला प्रदेश का ऐसा पहला जिला बन जाएगा जिसमें नियमित तौर पर वेतन प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों को अदालत की शरण लेनी पड़ रही है।जिला प्रशासन को स्वयं की छवि को दृष्टिगत रखते हुए हस्तक्षेप कर आर्थिक शोषण और प्रताड़ना के शिकार हुए अल्प वेतन प्राप्त करने वाले शिक्षकों को शीघ्र वेतन भुगतान करवाया जाना चाहिए।


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