हरदोई गूजर (जालौन), अजय मिश्रा । श्रावण मास में शिवभक्तों की अगाध आस्था का केंद्र रहे प्राचीन शिव मंदिर में पूरे माह अनेकों प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान भक्तों द्वारा कराये जाते रहे। प्रातः से ही जहां श्रद्धालुजन मंदिर में पूजा अर्चना के लिये आने शुरू हो जाते थे तो वहीं सोमवार के दिन रामायण पाठ व हवन पूजन का भी दौर चलता रहता था।
बताया जाता है कि बारहवीं सदी में निर्मित इस शिव मंदिर ने अनेकों उतार चढ़ाव भी देखे हैं। वर्ष 1857 की क्रांति का गवाह भी बना। जब अंग्रेजी सेना के सेनापति का पीछा करते हुये महारानी लक्ष्मीबाई ने इस मंदिर परिसर में एक रात्रि व्यतीत की थी। इस दौरान उन्होंने भगवान महादेव की बड़े ही श्रद्धाभाव से पूजा अर्चना की थी। इसके बाद यह शिव मंदिर बड़े सिद्ध साधकों की तपोस्थली के रूप में भी विख्यात रहा। जहां जनपद के ही नहीं गैर जनपदों व
प्रांतों के अनेकों भक्तजन आज भी अपनी मनोकामना की पूर्ति होने पर शिव मंदिर के दरबार में उपस्थित होकर पूजा अर्चना करते हैं। यही कारण है कि प्राचीन शिव मंदिर में शिवरात्रि व श्रावण मास में धार्मिक आयोजनों की श्रंृखला अनवरत चलती रहती है। गांव के उत्साही शिवभक्त ब्रह्मदत्त दूरवार, राघवेंद्र दूरवार, रामप्रकाश, शिशु शुक्ला, लोकेंद्र तोमर, याज्ञवेंद्र सिंह गुर्जर, जुगराज सिंह सेंगर, लल्लू सेंगर, रणसिंह गुर्जर, अर्जुन यादव, ऋषि तिवारी, अजुद्धी प्रजापति, रामकुमार यादव, सोनू प्रजापति, भगवती तिवारी, शिवकुमार यादव, लला सेंगर, धीरेंद्र यादव, पिंटू गुर्जर, दीपेंद्र यादव, दीपक प्रजापति, बब्बू सेंगर, हरिओम यादव, मनोज सेंगर, सुशील प्रजापति, मीनू दूरवार, गायेलाल जाटव, डा. कीरत सिंह जाटव, राजकिशोर दुबे आदि इस मंदिर की व्यवस्था से लेकर समय समय पर धार्मिक आयोजनों में अपना सहयोग देते रहते हैं।
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| प्राचीन शिव मंदिर में पूजा अर्चना करते भक्तजन। |


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