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Monday, August 17, 2020

अंग्रेजो की धरती पर फांसी का फंदा चूमा

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । सुमेरपुर की वर्णिता  संस्था ने जरा याद करो कुर्बानी के तहत ब्रिटिश धरती पर शहीद होने वाला पहला सूरमा मदन लाल धींगरा की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुये संस्था केअध्यक्ष डॉक्टर भवानी दीन ने कहा कि मदनलाल धींगरा सही मायने में नर नाहर थे ,जिन्होंने शेर को शेर की मांद में ललकार कर उसे ढेर कर दिया था। मदन लाल धींगरा का  जन्म 8 फरवरी 1883 को अमृतसर में  हुआ था,इनके पिता का नाम दित्तामल और माता का नाम मन्तो देवी था, ये आठ भाई बहन थे, इनका पढ़ने में मन नहीं लगता था, फिर भी अमृतसर और लाहौर में इनकी शिक्षा हुई थी, उसके बाद भाई के सहयोग से लंदन गए वहां पर इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लिया ।

वे अपने लक्ष्य पर अडिग रहे, कर्जन वायली एक क्रूर अंग्रेज अधिकारी थे, जो इंग्लैंड में रहकर भारतीयों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने में माहिर थे और सारे भारतीय देशभक्त नाराज थे  । उसके बाद मदन लाल धींगरा ने दामोदर सावरकर से परामर्श करके वायली को मारने का दृढ़ निश्चय किया और 1 जुलाई 1990 को जहांगीर हाउस में मदन लाल धींगरा ने कर्जन वायली को मौत के घाट उतार दिया । उसके बाद इन पर अभियोग चला और इन्हें 17 अगस्त1909 को फांसी पर लटका दिया गया, उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है । यह महान  पुरोधा थे और विदेशी धरती पर शहीद होने वाले ये दो महान क्रांतिकारी उधम सिंह और मदन लाल धींगरा थे। अवधेश कुमार गुप्ता एडवोकेट, राजकुमार सोनी सर्राफ, राधारमण गुप्त और राजकुमार सोनी सर्राफ प्रांशु और कल्लू चौरसिया,आरती गुप्ता  मौजूद रहे।


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