देवेश प्रताप सिंह राठौर
(वरिष्ठ पत्रकार)
............. महेंद्र सिंह धोनी ने जिस अंदाज से अपना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया और उन्होंने जो गाना कभी गुनगुनाते थे वह गाना बहुत ही मुझे भी पसंद है.....मैं पल दो पल का शायर हूं, पल दो पल मेरी कहानी है, पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी है ,मैं पल दो पल का शायर हूं पल दो पल मेरी कहानी है ,मुझसे पहले कितने शायर आए और आकर चले गए, कुछ आहें भर कर लौट गए कुछ नगमे गा कर चले गए, वह भी एक पल का किस्सा था, मैं भी एक पल का किस्सा हूं कल तुमसे जुदा हो जाऊंगा जो आज तुम्हारा हिस्सा हूं, मैं पल दो पल का शायर हूं, पल दो पल मेरी जवानी है, पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी कहानी है, कल और आएंगे नगमो की खिलती कलियां चुनने वाले, मुझसे बेहतर कहने वाले तुमसे बेहतर सुनने वाले, कल कोई मुझको याद करे ,क्यों कोई मुझको याद करे मशरूफ जमाना मेरे लिए ,क्यों अपना वक्त बर्बाद करें, मैं पल दो पल का शायर हूं. ....... महेंद्र सिंह धोनी ने इस गाने की साथ अपने क्रिकेट के जीवन के खेल के कुछ अंश चित्र के साथ जब बोल रहा था ,तो उनके प्रशंसकों की आंखें में आंसू आ रहे थे, क्यों आ रहे थे वह कभी मैं महेंद्र सिंह धोनी से नहीं मिले
लेकिन महेंद्र सिंह धोनी उस व्यक्ति का नाम है जिसने संकटों में भी भारतीय क्रिकेट को उठाने में बहुत बड़ा हिस्सा बने , लेकिन अफसोस इस बात का है। सन्यास देना व्यक्तिगत उनकी सोच हो सकती है लेकिन भारतीय क्रिकेट बोर्ड को चाहिए था उनका बहुत अच्छे सम्मानजनक तरीके से क्रिकेट के मैदान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सम्मिलित होते और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मैच खेलते हुए सन्यास देते फील्ड में वह बात पूरा देश को अच्छी लगती , परंतु कुछ अहंकार में क्रिकेट बोर्ड द्वारा महेंद्र सिंह धोनी को अच्छे प्रदर्शन के बाद भी टीम का हिस्सा नहीं बनाया गया क्यों क्योंकि क्रिकेट भी अब ईमानदारी पारदर्शिता नहीं रह गई है। वहां भी मामला सब फिक्स है सिर्फ एक महेंद्र सिंह धोनी ऐसे हैं जो भारत देश के लिए हर गेंद में जीत के लिए संघर्ष करते हैं। आज उनके करोड़ों प्रशंसक मेरे पास बहुत से लोगों के फोन आए मेरी बात हुई सभी महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास से दुखी थे, कि महेंद्र सिंह सिंह के पास अभी क्रिकेट बहुत बाकी है अभी और सेवाएं भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देने की क्षमता थी, महेंद्र सिंह धोनी में परंतु जिस गाने के साथ उन्होंने सन्यास लिया पूरा देश इस गाने को सुनकर देखकर कठोर से कठोर हृदय भी भावुक हो गया होगा, जबकि क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय में खेलने मैं उतना पैसा नहीं मिलता है जितना संन्यास के बाद उन्हें विज्ञापन एवम् आईपीएल द्वारा उन्हें कई सौ करोड़ सन्यास लेने के बाद कमाएंगे एक वनडे मैच में 3 या 6 लाख मिलता है ।साल में 8 या10 ही वनडे मैच होते हैं उस हिसाब से60लाख वार्षिक कमाई होती है। सन्यास लेने के बाद उससे अधिक महेंद्र सिंह धोनी की वार्षिक कमाई होगी। लेकिन पैसा ही सब कुछ नहीं होता है सम्मान की बात होनी चाहिए जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास में उन्हें पूर्ण सम्मान नहीं दिया तथा उनके साथ एक और खिलाड़ी सुरेश रैना ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया और आईपीएल में खेलने की बात महेंद्र सिंह धोनी ने की है। भारत में भ्रष्टाचारी कभी कम ना हुई है ना कभी कम होगी कहीं भी स्वच्छ स्वच्छता नहीं रह गई है ,हर जगह गुटबाजी चल रही है जिसमें कभी-कभी बहुत अच्छे अच्छे खिलाड़ी उन्हें मौका नहीं मिल पाता है। भारत में टैलेंट बहुत है लेकिन उस टैलेंट को समझने वाले बहुत कम है क्योंकि भ्रष्टाचारी आजादी के बाद रोम रोम में भर चुकी है जिसे निकालने में सरकार को कई दशक लगेंगे क्योंकि भ्रष्टाचारी एक ऐसा बीज है जिसकी जड़े पाताल तक पहुंच चुकी हैं इसको समाप्त करना बड़ा मुश्किल है, इसमें अच्छे अच्छे लोग इस भ्रष्टाचारी में फंसकर जीवन चौपट हो जाता है।


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