8 वर्षों बाद कटनी से लौटा बेघर परिवार
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । आठ वर्षों से परदेस में मजदूरी कर रहे रमेश का परिवार जब अपने मूल गांव मनगवां मजरा टिकरिया, मानिकपुर लौटा, तो उनकी हालत देख हर कोई दंग रह गया। गरीबी और बेबसी के बोझ तले दबे इस परिवार में रमेश की पत्नी उर्मिला और उनके पांच छोटे-छोटे बच्चे शामिल हैं- कुंदन (12), शिवानी (10), शिवमूरत (8), तेजबली (3) और महज 5 महीने की मासूम मोहब्बत। परिवार के लौटने की खबर मिलते ही बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आया और बीएसए के निर्देशन में अध्यापकों की टीम ने घर जाकर बच्चों का दाखिला पड़ोस के कंपोजिट विद्यालय टिकरिया में करा दिया। किताब-कॉपी से लेकर पढ़ाई की हर जरूरी सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई गई। लेकिन असली मानवीय पहल तब हुई, जब जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मामले का संज्ञान लिया। कलेक्ट्रेट में
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| बेबस परिवार के साथ डीएम व बीएसए |
पूरे परिवार को बुलवाकर डीएम ने खुद हालात का जायजा लिया। उन्होंने तत्काल नाजिर कलेक्ट्रेट अरुण कुमार शुक्ला को निर्देशित कर राइफल क्लब से 5000 रुपए की आर्थिक सहायता सबसे छोटी बच्ची के नाम जारी कराई। यहीं नहीं, डीएम ने उप जिलाधिकारी मानिकपुर मोहम्मद जसीम को आदेश दिया कि परिवार के लिए स्थायी आवास और नियमित भोजन की व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित हो। साथ ही, राशन कार्ड, पुष्टाहार और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने का आदेश संबंधित अधिकारियों को दिया। परिवार को तुरंत बीडीओ मानिकपुर के वाहन से सुरक्षित गांव भेजा गया। जिलाधिकारी की इस तत्परता और संवेदनशीलता ने न केवल एक बेघर परिवार को नई उम्मीद दी बल्कि सरकारी मशीनरी की मानवीय तस्वीर भी सामने रखी।


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