सड़क टूटी, सुविधाएँ रूठी और जिम्मेदार मौन
भैरम बाबा मंदिर की दुर्दशा
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । सैकड़ों गाँवों की आस्था का केंद्र मठदर का भैरम बाबा मंदिर आज भी उपेक्षा की मार झेल रहा है। दशकों से लगातार मांग उठने के बावजूद यहां तक पहुँचने वाली सड़क आज तक नहीं बन पाई। न तो वन विभाग, न पर्यटन विभाग, न तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने इस धार्मिक स्थल के विकास में कभी रुचि दिखाई। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि भैरम बाबा मंदिर भादौ महीने में सिद्धपुर, सोनेपुर, कर्वी माफी, कोल गदहिया, रेहुँटिया, शीतलपुर सहित घाटी के नीचे बसे दर्जनों गाँवों के लाखों श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था स्थल है। बावजूद इसके श्रद्धालुओं को ऊबड़-खाबड़ रास्तों, बरसाती नाले और
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| कीचड व पानी से भरा हुआ पूरा रास्ता जिससे ग्रामीण निकलने को मजबूर |
खस्ताहाल मार्ग से होकर मंदिर पहुँचना पड़ता है। वर्षों से सड़क, बिजली, पानी, टीनशेड और यात्री बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं की दरकार है। हालांकि कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने पेयजल संकट देखते हुए एमएलसी निधि से सोलर पंप की स्थापना कराई थी, जिससे पानी की समस्या तो काफी हद तक सुलझ गई, लेकिन बाकी सुविधाएँ जस की तस पड़ी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मठदर वन ब्लॉक में वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत के दौरान यहां आए थे और तत्कालीन डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ला ने मंदिर पहुंचकर सड़क व यात्री सुविधाओं का आश्वासन दिया था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद वह पहल अधूरी रह गई। अब एक बार फिर बुंदेली सेना ने जिलाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से भैरम बाबा मंदिर को उचित रूप से विकसित करने की मांग उठाई है।


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