वोटबैंक की चौपाल या विकास का मंथन?
विकास की राह पर जाति का चश्मा
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । राजनीति की बिसात पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का रविवार का दौरा चर्चा और सवाल दोनों छोड़ गया। सबसे पहले उन्होंने प्रजापति समाज के महासम्मेलन में शिरकत की और कहा कि उनके आगमन को जातिवादी चश्मे से न देखा जाए। किंतु विडंबना यह रही कि कार्यक्रम की रंगत ही समाज विशेष तक सिमटी रही? ऐसे में जनता का यह कहना स्वाभाविक है कि चिराग तले अंधेरा क्यों बना हुआ है? इसके बाद निरीक्षण भवन सभागार में हुई समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री ने योजनाओं की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त गिना डाली। मनरेगा से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल नल मिशन से लेकर ग्राम सड़क योजना तक हर योजना का उल्लेख हुआ। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर अधिकारी बर्खास्त किए जाएंगे, और योजनाओं में भेदभाव बर्दाश्त नहीं होगा। लेकिन सवाल है कि ढाक के तीन पात की तरह इन चेतावनियों का नतीजा आखिर कब सामने
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| न्याय के लिए ज्ञापन लिए दर दर भटकता ममता मिश्रा का परिवार |
आएगा? जिले की जनता ने आज तक कितने अधिकारियों को वास्तविक दंड भुगतते देखा है? शायद गिनती के लिए भी ऊँगलियाँ ज्यादा पड़ जाएँ। उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि मोदी सरकार के आने से गरीबी घटी है और खुशहाली आई है। किंतु जिले का किसान अब भी खाद की कतार में खड़ा है, नौजवान रोजगार की तलाश में दर-दर भटक रहा है और पथरीली जमीन पर विकास के वादे बार-बार दम तोड़ देते हैं। पीडब्ल्यूडी निरीक्षण भवन की समीक्षा बैठक में मौर्य ने योजनाओं की सफलता का राग अलापा, मानो हर गली में दूध-दही की नदियाँ बह रही हों। जबकि हकीकत यह है कि गरीब अब भी रोटी के दो टुकड़ों के लिए जूझ रहा है, किसान कर्ज में डूबा है और युवा बेरोजगारी की चक्की में पिस रहा है। दौरे का राजनीतिक निचोड़ यह रहा कि भाषणों की गूंज आसमान तक तो पहुँची, लेकिन जमीन पर असर की आहट न के बराबर रही। जनता सवाल पूछने लगी है कि आखिर यह दौरा विकास का संदेश लेकर आया था या फिर केवल जातिगत समीकरणों की गोटियाँ साधने का प्रयास भर था?
भगोडे भाजपाई पर उपमुख्यमंत्री की चुप्पी मानिकपुर की बहुचर्चित ममता मिश्रा आत्महत्या कांड में न्याय की जंग अब भी अधूरी है। एक महीना बीत चुका है, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी पूरा न्याय मिलने की राह देख रहा है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के चित्रकूट दौरे के दौरान परिजनों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा और अपनी पीड़ा सामने रखते हुए कहा कि अब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। परिजनों की मांग साफ थी- हमें चाहिए पूरा न्याय। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उपमुख्यमंत्री ने आधिकारिक स्तर पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। न यह कहा कि भगोड़े भाजपा नेता की गिरफ्तारी कब होगी और न यह कि मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों से जवाब-तलबी होगी।


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