#अरविन्द_विद्रोही
#बाराबंकी । रविवार, 14 सितंबर ।। बीते कल शनिवार 13 सितंबर को प्रातः 11 बजे बाराबंकी घर से निकला और रास्ते में मिलते मिलाते करीब 11.30 बजे सपा के राष्ट्रीय सचिव अग्रज अरविन्द कुमार सिंह " गोप " ( पूर्व काबीना मंत्री - उप्र शासन) के सिविल लाइंस घर पहुंचा । बहुत दिनों से मुलाकात नही हुई थी इसलिए मन में विचार आया कि जब इधर से गुजर ही रहा हूं तो मिल ही लेता हूं और #छात्र हितों के लिए हालिया हुए संघर्ष में मुखरित स्वर में साथ देने के लिए उनको धन्यवाद भी दे दूं । सपा जिला उपाध्यक्ष अजय वर्मा बब्लू , हशमत अली गुड्डू ( पूर्व ब्लाक प्रमुख ) , अमित नाग आदि मौजूद थे ,नमस्कार के साथ ही अंदर कक्ष में बैठने के लिए मुझे कहा गया । बाहर बरामदे में संचालित कार्यालय मैं अगर जनसंवाद केंद्र कहूं तो उचित ही होगा । अंदर कक्ष में सभी कुर्सियों पर आगंतुक विराजमान थे , मैंने प्रवेश किया एक नजर किसी खाली कुर्सी की तलाश में हर तरफ दौड़ाई लेकिन यह
तलाश व्यर्थ ही थी । तभी एक युवा जो दरवाजे के बगल की कुर्सी पर बैठा था वो उठा और उसने मुझसे कहा कि आप यहां बैठिए ... मैंने उसे धन्यवाद दिया और उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा कि नही आप बैठ जाओ , आप पहले से हो, मैं बैठता हूं बाहर , कोई दिक्कत नही । वो युवा हंस कर बोला : विद्रोही भाई , अब आप बैठिए यहां पर आराम से । आप आराम से बैठ कर सब सुनेंगे , देखेंगे तो लिखेंगे भी और आपके लिखे को पढ़ने में मजा भी आता है और सीखने को भी मिलता ...
मैं उस युवा के अधिकार पूर्ण अनुरोध और मेरे लेखन के प्रति विश्वास के वशीभूत होकर बैठ गया ।
उपस्थित जनों में कुछ लोग आपस में धीरे धीरे वार्ता करते दिखे । बाहर कुछ महिलाएं गोद में बच्चे लिए भी दिखी थी । मैं पुनः सोचने लगा कि इतनी भीड़ लगातार क्यों अरविन्द सिंह गोप के घर पर नियमित बनी रहती है ? सत्ता से दूर तो हैं ही, विधायक भी नहीं हैं फिर भी कैसे अरविन्द सिंह गोप सपा कार्यकर्ताओं , आगंतुकों के हित और इच्छाओं की कसौटी पर खरे उतरते है ? क्या कोई जादूगर हैं वे ? एक घरेलू सेवक मिठाई और पानी लेकर सभी के सम्मुख जाता है और सभी से खाने पीने का अनुरोध करता है । लोग मिष्ठान सेवन करते हैं । कुछ ही देर बाद सभी के लिए चाय आ जाती है । लोग चाय पीते हैं , मैं चुप चाप बैठ कर बातों को सुनने की और समझने की चेष्टा में लगा था । एक बात मेरे जेहन में आई कि करीब आधा घंटा हो गया मुझे ही आए और ये लोग तो और पहले से बैठे थे लेकिन किसी के चेहरे पर कोई झुंझलाहट नही दिख रही कि अभी तक भी गोप भाई इधर कक्ष में नही आए । यह भी मेरे लिए आश्चर्य सरीखा था क्योंकि अक्सर नेताओं के घर पर उपस्थित लोग बड़ी जल्दी में रहते हैं और तनिक सी देरी में उस नेता को कोसने में कंजूसी भी नही करते हैं ...
बहरहाल तभी गोप भाई आ जाते हैं और सभी से मुखातिब होते हैं ।दोपहर के 12.30 बज चुके होते हैं । वे सभी से चाय पानी पूछते हैं । कुछ एक जन अलग से वार्ता करने को कहते हैं तो उनसे गोप भाई विनम्रता पूर्वक कहते हैं कि थोड़ी देर उधर कक्ष में बैठिए , पहले जरा सभी के काम सुन समझ लूं फिर इत्मीनान से आपसे बात करता हूं ।
दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रानीकटरा निवासी समाजवादी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष कवि आनन्द कौशल का जन्मदिन भी था । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद कुमार सिंह गोप और अविरल कुमार सिंह ने आनंद कौशल को माला पहना कर गुलदस्ता और अंगवस्त्र भेंट कर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित करते हुए उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए केक काट कर खिलाया और दीर्घायु होने की कामना की। सभी उपस्थित जन को केक खाने को दिया जाता है , लोग आनंद पूर्वक केक का भी स्वाद लेते हैं ।
फिर सिलसिला शुरू होता है सरकारी कार्यालयों में लम्बित जनहित संबंधित मामलों में त्वरित सिफारिश का ...
क्रमबद्ध तरीके से एक के बाद दूसरा ,तीसरा ,चौथा करते करते कक्ष में उपस्थित सभी जनों के कार्य के लिए सक्षम अधिकारी से दूरभाष पर वार्ता करते रहे अरविन्द सिंह गोप । मैं पीछे की कुर्सी पर इत्मीनान से बैठा लोगों की भाव भंगिमा को पढ़ रहा था । जिन महिलाओं की आवास संबंधित समस्या थी , वे फोन के बाद कक्ष से निकलते समय आपस में कह रही थी कि अब हमारी छत बची रहेगी ... हर्ष की अनुभूति उनके चेहरे और उनकी वाणी से झलक रही थी । खैर , तभी गोप भाई ने फिर से कहा कि किसी और का कोई मामला तो नही बचा , जल्दी बताओ । एक सज्जन उठे, उनका कोई कार्य था उन्होंने पत्र सौंपा और पत्र को सरसरी निगाह से देखते हुए गोप भाई ने एक अधिकारी को फोन मिलाने के लिए निर्देशित किया । फोन से बात की और उन अधिकारी से कहा कि इनको आपके पास भेज रहा हूं , ये भले आदमी हैं और हमारे बहुत करीबी ... ठीक है ... ये अभी पहुंच रहे आपके पास । फोन रख कर उनसे बोले गोप भाई : जाइए और तुरंत मिलिए , फिर जैसा हो मुझे बताइए । तब तक बाराबंकी की श्री राम लीला आयोजन समिति के सदस्य गण आमंत्रण हेतु आ जाते हैं । पत्रकार नीतेश मिश्र भी उनके संग संग आते हैं ।
उधर दूसरे कक्ष में भी लोग इंतजार कर रहे थे , करीब एक घंटे इधर बीत गए थे अब दोपहर के 1.35 हो गए थे । गोप भाई अपनत्व पूर्ण भाव से समिति के सदस्यों से कहते हैं बैठिए अभी उधर मिलकर आता हूं । दरअसल इसी बीच लखनऊ विश्विद्यालय के वरिष्ठ छात्र नेता रहे सत्येंद्र पाण्डेय अपने साथियों समेत अरविन्द सिंह गोप से मुलाकात हेतु आए थे ,वे भी इंतजार कर रहे थे । उनके साथ सपा जिला अध्यक्ष हाफिज अयाज अहमद , धीरेन्द्र वर्मा बैठे थे । अरविन्द सिंह गोप उधर उपस्थित जनों से मिलने और वार्ता हेतु चले जाते हैं । बमुश्किल दस मिनट भी नहीं हुए कि पंडित राजनाथ शर्मा भी उनके प्रांगण में प्रवेश करते मुझे दिखे । मैं तुरंत उनके पास गया , चरण स्पर्श किया , उनके साथ पत्रकार साथी पाटेश्वरी , रणंजय शर्मा भी थे । सभी लोग वार्ता कक्ष में प्रविष्ट हुए , मैं इधर ही कक्ष में रुका क्योंकि यहां श्री राम लीला समिति के सदस्य बैठे थे ।कुछ ही देर में गोप भाई फिर इधर कक्ष में आते हैं । उनके पुत्र अविरल सिंह भी आते हैं। श्री राम लीला आयोजन समिति द्वारा उनको आमंत्रण पत्र सौंपा जाता है । गोप भाई नीतेश मिश्र के आयोजन संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हैं । सामूहिक फोटोग्राफी भी होती है । आयोजन समिति के अनुरोध पर दंगल के दिन अविरल सिंह की उपस्थित तय की जाती है । पुनः श्री राम लीला समिति के सदस्यों से नमस्कार विदाई के बाद दूसरे कक्ष में अरविन्द सिंह गोप जाते हैं इधर कक्ष में अब सन्नाटा हो गया होता है । करीब दो बज गए होते हैं । मुझे गोप भाई का उस दूसरे कक्ष में आने का संदेश मिलता है , मैं पहुंचता हूं ।
कक्ष में वयोवृद्ध पंडित राजनाथ शर्मा की उपस्थिति बैठकी को जानकारी से समृद्ध करने वाली ही साबित हुई । गोप भाई ने मेरे कक्ष प्रवेश करते ही मुझसे पूछा कि पंडित जी से मिले कि नही ? फिर अपनी चिर परिचित अंदाज में पंडित राजनाथ शर्मा ने टिप्पणी की , वे तो मेरे अभिभावक ही हैं । तभी पाटेश्वरी ने कहा कि अरविन्द भाई बाहर मिल चुके हैं इस पर फिर पंडित जी ने चुटकी ली ...
दरअसल पंडित राजनाथ शर्मा एक जीवंत संस्थान हैं : पुराने समय की सामाजिक राजनैतिक अनकही अनलिखी जानकारियों का भंडार उनके पास है । मुझे व्यक्तिगत कल शनिवार को बहुत प्रसन्नता हुई जब मैने देखा कि अरविन्द कुमार सिंह गोप पूरी तल्लीनता से उनकी बातों को सुन रहे हैं । हमारे अभिभावक पंडित राजनाथ शर्मा ने मेरी तिलक , विवाह से लेकर बाराबंकी के एक राजा की शादी तक के प्रसंग को सभी से साझा किया । मेरे स्व पिता श्री नरेश चंद्र श्रीवास्तव के प्रति उनके आदर और अपनत्व के भाव कल पुनः सार्वजनिक हुए। बाराबंकी की प्रमुख हस्तियों की भी चर्चा हुई तो लखनऊ विश्विद्यालय के कुलपति रहे स्व हरिकृष्ण अवस्थी की भी ... फिर हम सभी लोग निकलते हैं । इस पूरे समय के दौरान चार या पांच बार अरविन्द कुमार सिंह गोप आगंतुकों को मुख्य द्वार तक विदा करने भी जाते हैं और उनके सारथी द्वारा उनकी गाड़ी को स्टार्ट करके आगे बढ़ाने का कार्य होता है । हर बार अग्रज गोप उसे हाथ से इशारा करके रोकते हैं और फिर कक्ष में मिलने आ जाते थे । उन्हें लखनऊ भी जाना था लेकिन घर आ गए कार्यकर्ताओं , आगंतुकों ,अतिथियों को बगैर संतुष्ट किए ,उनका कार्य किए गंतव्य के लिए निकलना तो अग्रज गोप की आदत ही नही रही है ।
संस्मरण और वरिष्ठों के अनुभव को धैर्य पूर्वक सुनना और समझना आज के राजनैतिक दौर में कितनों को आता है ? जिस धैर्य और उत्सुकता से बीते कल शनिवार को अरविन्द सिंह गोप ने पंडित राजनाथ शर्मा के सानिध्य में जानकारी का अर्जन कार्य किया वो मुझे याद दिलाता है #जार्ज_फर्नांडीज और #नेताजी #मुलायमसिंह_यादव की पढ़ने , लिखने और सुनने की सीख को ...
क्या लिखूं क्या रहने दूं ? सोचा था कि बीती शाम ही यह लिख दूंगा कम शब्दों में लेकिन यह असंभव हुआ । मैं कम शब्दों में कल शनिवार के घटनाक्रम को सहेजने में स्वयं को असफल पाया । फिर भी कुछ नाम , कुछ घटनाएं छूट भी गई हैं उनके लिए क्षमा प्रार्थी हूं मैं 🙏
कल शनिवार था , न्याय के देव का दिन और आज रविवार है : सूर्य देव का दिन ।
न्याय के देव भगवान शनिदेव न्याय करेंगे और भगवान सूर्य देव अपनी ऊर्जा युक्त किरणों के आशीर्वाद से #शक्ति स्वरूपा जगत जननी #मां #जगदम्बा के अनन्य #भक्त अग्रज अरविन्द कुमार सिंह " गोप " को और अधिक सामर्थ्य वान बना कर , सेवा भाव में लगाए रखेंगे यही #सनातन विश्वास है , अटूट निष्ठा है ।
Akhilesh Yadav
Dimple Yadav
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