सदर विधायक का सीधा सवाल
खून से लिखे पत्र भी बेअसर
चित्रकूट को मेडिकल कॉलेज कबघ्
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । अनिल प्रधान ने 16 फरवरी को उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रथम सत्र में चित्रकूट की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आकांक्षी जनपद चित्रकूट का संयुक्त जिला चिकित्सालय और 200 बेड का मातृत्व एवं शिशु चिकित्सालय महज रेफर सेंटर बनकर रह गए हैंए जहाँ न विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न पर्याप्त स्टाफ। जिले में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ का न होना गंभीर चिंता का विषय है। मेडिकल कॉलेज की मांग पर वर्षों से पीपीपी मॉडल का वही घिसा.पिटा जवाब मिल रहा हैए जबकि मुख्यमंत्री के वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज के वादे को नौ वर्ष बीत चुके हैं। युवाओं ने आमरण अनशन कियाए खून से पत्र लिखेए पर ठोस घोषणा आज भी नहीं हुई। तारांकित व अतारांकित प्रश्नों के माध्यम से विधायक ने 2017 से अब तक स्थापित मेडिकल कॉलेजोंए चिकित्सा विश्वविद्यालयोंए 24 घंटे पोस्टमार्टम व्यवस्थाए कैंसर
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| सदर विधायक अनिल प्रधान |
अस्पतालए आइसोलेशन वार्डए स्टाफ नर्स व वार्ड बॉय की रिक्तियों तथा आशा बहुओं के मानदेय वृद्धि जैसे मुद्दों पर जवाब माँगा। पर्यटन योजनाओं में वित्तीय स्वीकृतियों और टीएसी जांच की मांग कर पारदर्शिता पर भी सवाल उठाया। पशुधन आश्रयों में मौतों और सड़कों पर छुट्टा पशुओं से हो रही दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी तय करने की बात कही। वहीं रेशम विभाग में सिल्क समग्र.2 योजना में कथित दलाली और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। सदन में उनका सीधा प्रश्न गूंजता रहा. चित्रकूट को उसका हक कब मिलेगाघ्
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