नदी नहीं, कुंड में विसर्जन का संदेश
राजाघाट में विसर्जन कुंड निर्माण की मांग
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले के पुलघाट पर वर्षों से जमी काई और गंदगी के खिलाफ अब समाज खुद मोर्चा संभालता दिख रहा है। बुंदेली सेना ने घाट की खतरनाक फिसलन को खत्म करने के लिए अनोखा अभियान छेड़ते हुए 25 बोरी क्रसर बालू सीढ़ियों पर डलवाई और जोरदार घिसाई कर घाट को काई रहित बनाने की पहल की। यह वही पुलघाट है, जहां रोजाना भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन काई के कारण हर कदम जोखिम भरा हो जाता था। जिलाध्यक्ष अजीत सिंह के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित और जागरूक बनाना भी है। सेना ने साफ शब्दों में अपील की है कि पूजन सामग्री सीधे नदी में न बहाकर किनारे बने
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| पयस्वनी घाट पर बालू डालते बुंदेली सेना |
हवन-विसर्जन कुंड में ही डाली जाए, क्योंकि अंधाधुंध विसर्जन ने एक घाट को सड़ांध का अड्डा बना दिया है। बुधवार से उस घाट की सफाई भी शुरू कर दी गई है और तीनों घाटों को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही राजाघाट में भी विसर्जन कुंड निर्माण की मांग उठाई गई है। संदेश साफ है- नदी किसी सरकार की नहीं, समाज की जिम्मेदारी है, और अब समाज ही इसके संरक्षण के लिए जाग उठा है।
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