चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : पाठा क्षेत्र के किसानों को बागवानी के साथ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पांच गांवों के 30 महिला-पुरुष किसानों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान की ओर से हार्वेस्ट परियोजना के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में मोटवन, बम्बिहा, टिकरिया, डोडा माफी और डोडा कोलान के किसानों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षक सुरेंद्र कुमार कुशवाहा ने पाठा की जलवायु और परिस्थितियों के अनुसार आंवला, अमरूद, नींबू, मुनगा, बेल और जामुन जैसे फलदार पौधों के रोपण को लाभकारी बताया। उन्होंने किसानों को बागवानी को प्राकृतिक खेती से जोड़ने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने
के लिए प्रेरित किया। साथ ही देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से घनजीवामृत व द्रवजीवामृत तैयार करने की विधि बताते हुए इनके उपयोग से खेती की लागत कम करने की जानकारी दी। प्रशिक्षक देशराज यादव ने नीमास्त्र, अग्नियास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक कीट नियंत्रण उपायों की जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय संसाधनों के उपयोग से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटाने पर जोर दिया। प्रशिक्षण में किसानों ने अपने खेतों में कम से कम एक-एक बीघा भूमि पर प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में भरतलाल, देवकुमार, सूरज कुमार और सरला साकेत ने सहयोग किया। समापन पर भरतलाल ने सभी के प्रति आभार जताया।


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