दर्जनों कच्चे घरों में घुसा जल, सैकड़ों एकड़ धान की फसल तबाह
बबेरू/बांदा, के एस दुबे । कमासिन क्षेत्र में सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है। वीरा माइनर की पटरी कटने से नहर का तेज बहाव खेतों और रिहाइशी बस्ती में घुस गया। देखते ही देखते दर्जनों कच्चे घरों में घुटनों तक पानी भर गया, जिससे ग्रामीणों का सारा गृहस्थी का सामान, अनाज और पशुओं का भूसा डूबकर बर्बाद हो गया। वहीं सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान की लहलहाती फसल जलमग्न होने से किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कमासिन-राजापुर मुख्य मार्ग पर स्थित चंदेल फिलिंग स्टेशन के पास वीरा माइनर की पटरी कई स्थानों से क्षतिग्रस्त थी। बारिश के बाद माइनर ओवरफ्लो हुई और पानी आबादी क्षेत्र की ओर मुड़ गया। जल संस्थान के पीछे, पुराने स्वास्थ्य केंद्र परिसर तथा बीपैक्स सहकारी समिति के पीछे बसे मोहल्लों के कच्चे मकान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। सुबह लगभग 4 बजे जब सो रहे ग्रामीणों की नींद खुली, तो घरों में तेजी से पानी प्रवेश कर रहा था। अनाज, कपड़े, राशन और भूसा सब डूब गया। कई परिवारों के पास खाना बनाने तक का स्थान नहीं बचा है, जिससे छोटे-छोटे बच्चों के साथ लोग खुले में रहने को मजबूर हैं।
किसानों का आरोप है कि वीरा माइनर की तलहटी की सालों से सफाई नहीं कराई गई है। नहर में झाड़-झंखाड़ जमा होने और पटरियां कमजोर होने के कारण यह हादसा हुआ। धान की प्रति बीघा खेती में लगभग 10 हजार रुपये का खर्च आता है। सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूबने से किसानों की कमर टूट गई है। पीड़ित ग्रामीणों और किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रशासनिक टीम भेजकर जल निकासी का प्रबंध कराया जाए। वीरा माइनर की कटी पटरी की तुरंत मरम्मत की जाए। क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों, डूबे राशन और बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कराकर जल्द से जल्द उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।


No comments:
Post a Comment