कृषि विज्ञान केंद्र की टीमें गांव-गांव जाकर कर रही मदद
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित किसानों व पशुपालकों को राहत पहुंचाने के लिए दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां की ओर से सघन राहत, पशु स्वास्थ्य और रबी पुनर्वास अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र के वैज्ञानिक प्रभावित गांवों में पहुंचकर राहत सामग्री वितरण के साथ फसल क्षति का आकलन और किसानों को तकनीकी सलाह दे रहे हैं। केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक उत्तम कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम मानिकपुर विकासखंड के जारोमाफी, संकरौंहा, ऊंचाडीह, कल्याणपुर, इटवाडुंडला,
डोड़ामाफी, टिकरिया, जमुनाही, बारहमाफी, मनगांव और आमचूर नेरूवा गांवों में लगातार भ्रमण कर रही है। बाढ़ में झोपड़ियां और कच्चे मकान क्षतिग्रस्त होने वाले परिवारों को अब तक 184 त्रिपाल वितरित की जा चुकी हैं। वहीं धान, तिल, उड़द सहित खरीफ फसलों को हुए नुकसान का खेतों में जाकर आकलन किया जा रहा है तथा जलभराव से प्रभावित खेतों में पानी निकासी और रोग-कीट नियंत्रण की सलाह दी जा रही है। खरीफ फसल के नुकसान के बाद किसानों को रबी सीजन में सहारा देने के लिए 550 से अधिक प्रभावित परिवारों का सर्वे किया गया है। उनकी जोत और संसाधनों के अनुसार सरसों, चना, जौ, गेहूं, मसूर और मटर के उन्नत बीजों की मांग जुटाई जा रही है, ताकि समय पर निःशुल्क या अनुदानित बीज उपलब्ध कराया जा सके।
इसके अलावा सदर ब्लाक में एनआईसीआरए परियोजना के तहत पशु स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए। रमपुरवा में 132 और बैहार में 315 पशुओं का टीकाकरण किया गया। 14 बीमार पशुओं का मौके पर उपचार हुआ। केंद्र ने जिले की 160 प्रभावित ग्राम पंचायतों में पशु टीकाकरण व उपचार के लिए वृहद कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए पशुपालन विभाग समेत संबंधित कृषि एवं पशु चिकित्सा संस्थानों से सहयोग मांगा गया है। केंद्र के वैज्ञानिक, तकनीकी कर्मचारी और कृषि ज्ञान दूत अभियान में लगातार जुटे हैं।
अतिवर्षा के बाद धान में रोग-कीट प्रकोप की आशंका, किसान बरतें सावधानी- उत्तम-
चित्रकूट: कृषि वैज्ञानिक उत्तम कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अतिवर्षा के बाद कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के वैज्ञानिकों ने धान की फसल में जड़ व तना सड़न, शीथ ब्लाइट, ब्लास्ट, जीवाणु झुलसा तथा तना छेदक, पत्ती लपेटक और फुदका के प्रकोप की आशंका जताई है। जिसके तहत वैज्ञानिक गांव-गांव फसल का निरीक्षण कर किसानों को सलाह दे रहे हैं। किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और नियमित निगरानी करने को कहा गया है। रोग नियंत्रण के लिए अनुशंसित कार्बेन्डाजिम, हेक्साकोनाजोल व प्रोपिकोनाजोल तथा कीट नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल का प्रयोग लेबल के अनुसार करने की सलाह दी गई है। इस दौरान बताया गया कि धूप बढ़ने पर रोग-कीट का प्रकोप बढ़ सकता है, इसलिए किसान सतर्क रहें।


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