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Wednesday, September 16, 2026

विश्वकर्मा पूजा 17 सितम्बर

सूर्य देव के कन्या राशि में प्रवेश करने पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है इस वर्ष  विश्वकर्मा पूजा 17 सितम्बर को है। भगवान विश्वकर्मा देवी-देवताओं के शिल्पकार थे इन्हे  देवशिल्पी, वास्तु शास्त्र के स्वामी, देवताओं के अभियन्ता माना जाता है, सभी अस्त्र-शस्त्र व वाहनों का निर्माण विश्वकर्मा जी ने किया था। देवताओ का स्वर्ग हो, सोने की लंका हो या भगवान कृष्ण जी की द्वारिका नगरी और पांडवो की राजधानी हस्तिनापुर इन सभी राजधानियों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा द्वारा किया गया  है। जो की वास्तु कला की अद्भुत मिशाल है। विश्वकर्मा जी को औजारों का देवता भी कहा जाता है। भगवान विश्वकर्मा ने इन्द्रपुरी,  पुष्पक विमान, इंद्रप्रस्थ,  इंद्र का वज्र, इंद्र और कुबेर के महल का निर्माण किया। । कर्ण के कुण्डल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, शंकर भगवान का त्रिशूल यमराज का कालदण्ड का निर्माण किया था। सभी देवी- देवताओं भवन और दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं का निर्माण किया है.


 अतः इस दिन सभी फैक्ट्ररी, दुकानों व निर्माण स्थलोें पर जहाँ औजारों व मशीनों का उपयोग होता है सभी लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते है। हिन्दू धर्म शास्त्रो के अनुसार  ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म के सातवे संतान जिनका नाम वास्तु था। विश्वकर्मा जी वास्तु के पुत्र थे जो अपने माता-पिता की भांति महान शिल्पकार हुए जिन्होंने इस सृस्टि में अनेको प्रकार के निर्माण इन्ही के द्वारा हुआ। विश्वकर्मा पूजा के दिन षष्ठी तिथि,चन्द्रमा वृश्चिक राशि, अनुराधा नक्षत्र रहेगा।  

 17 सितम्बर को प्रात: 07:58  पर सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेगें। संक्रांति का  पुण्यकाल का मुहूर्त प्रात: 07:58 से लेकर दोपहर 02:31 तक है संक्रांति के पुण्य काल में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना गया है।

विश्कर्मा पूजा विधि

भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए सुबह  स्वच्छ कपड़े पहनें और भगवान विश्वकर्मा के चित्र को पीले वस्त्र पर रख कर पूजा करें.भगवान  विश्वकर्मा की पूजा में , अक्षत, हल्दी, फूल, पान, लौंग, सुपारी, मिठाई, फल, धूप, दीप और रक्षासूत्र से पूजा शुरु करें. आप जिन वस्तुओं / मशीन / औजारो  की पूजा करना चाहते हैं उन पर हल्दी  और चावल लगाएं. इसके बाद कलश को हल्दी और चावल के साथ रक्षासूत्र चढ़ाएं, इसके बाद पूजा करें. जब पूजा समाप्ति पर सभी लोगों में प्रसाद का वितरण करें. 

--- ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ


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