जनता से मिलने के समय में नहीं मिलते अधिकारी रहते हैं फरार
बांदा, के एस दुबे । शहर में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड के परियोजना प्रबंधक कार्यालय को लेकर भ्रष्टाचार के आरोपों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड में परियोजना प्रबंधक, यू.पी. प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लि., ई-13 बांदा कार्यालय बांदा में स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग में कराए जाने वाले निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ठेकेदारों को भुगतान और कार्यों की निगरानी को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि कई कार्यों में मानकों की अनदेखी कर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बनी हुई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा पिछले वर्षों में कराए गए निर्माण कार्यों, स्वीकृत लागत, टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और मौके पर कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाना जरूरी है।
आरटीआई से खुल सकता है पूरा खेल
मामले में यदि निर्माण कार्यों की स्वीकृत लागत, टेंडर किसे मिला, कितनी धनराशि जारी हुई, एमबी (Measurement Book) में कितना कार्य दर्ज है और मौके पर कितना कार्य हुआ, इसकी जांच कराई जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। सवाल यह है कि क्या विभाग विभाग के अधिकारियों का बैठने का समय नहीं निर्धारित किया गया या फिर अधिकारी ही नहीं बैठते केवल गायब रहते हैं उच्चस्तरीय जांच कराकर आरोपों की सच्चाई सामने लाएगा या मामला फाइलों में ही दबा रहेगा? जब पूरे मामले की जानकारी परियोजना प्रबंधक ए एस राठौर से लेनी चाहि तो वह भी कार्यालय में नहीं मिले वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि यह अधिकारी हमेशा लखनऊ में छाए रहते हैं और कभी भी जानता के मिलने के समय में नहीं मिलते हैं इसलिए फरियादी लोग वापस चले जाते हैं और सहायक परियोजना अधिकारी सुनील कुमार कनौजिया भी मौके पर नहीं मिले।


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