मरणोपरांत परिजनों ने कराया नेत्रदान
इनसे प्रेरणा ले समाज के हर व्यक्ति को इस पुनीत कार्य में आना चाहिए आगे, डॉ इलेश जैन
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि- वैसे तो लोग रक्तदान कर दूसरों को जिंदगी देते है जो अब यह आम बात है।अगर कोई अंग दान कर किसी को नई जिंदगी दे तो शायद इससे बड़ा कोई परोपकार नही हो सकता है। ऐसा ही ही वाक्या देखने को को मिला चित्रकूट जनपद के मुख्यालय कर्वी पुरानी बाजार में कपड़े के व्यवसाई रहे श्री राम अग्रवाल जी का आकस्मिक निधन हो गए, उनके निधन के पश्चात उनके पुत्र पुनीत अग्रवाल, विनीत अग्रवाल एवं उनके परिजनों ने मरणोपरांत नेत्रदान जैसा महादान करके एक पुनीत कार्य किया है उनके दोनों पुत्रों ने बताया कि हमारे स्व.पिता जी की एवं हमारे सारे परिवार की इच्छा थी कि हम लोग उनको तो जिंदा नहीं कर सकते पर नेत्रदान करके उनकी आंखों को तो जिंदा रख सकते है और उनकी आंखों से दो परिवार या उससे अधिक इस
दुनिया को देख सकते है इससे बड़ा क्या पुण्य होगा। साथ ही इस पुनीत कार्य के लिए हमारे रिश्तेदार हरि प्रकाश अग्रवाल जी एवं सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के वरिष्ठ कार्यकर्ता आरबी सिंह चौहान द्वारा भी प्रेरित करने का काम किया गया। इसलिए उनकी मृत्यु के पश्चात हमने सदगुरू नेत्र चिकित्सालय चित्रकूट के आई बैंक की टीम को सूचना दी और उनका नेत्रदान कराया है जो महादान की श्रेणी में आता है।सूचना के मिलते ही तत्काल चिकित्सीय टीम पहुंच गई और नेत्रदान की प्रक्रिया को पूर्ण किया। वही सदगुरू नेत्र चिकित्सालय टीम ने बताया कि इस नेत्रदान से दो और उससे अधिक लोगों को नई रोशनी मिलेगी। चित्रकूट क्षेत्र वासियों सहित आम जनमानस के लिए यह एक सीख है कि किसी ने मरणोपरांत अपने परिवार के सदस्य का नेत्रदान कराया है। वही सदगुरू नेत्र चिकित्सालय के निदेशक एवं ट्रस्टी डॉ इलेश जैन ने पुण्य आत्मा के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि नेत्रदान बहुत ही पुनीत कार्य है इस पुनीत कार्य के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए और इस पुनीत कार्य में भागेदारी निभाना चाहिए, साथ ही समाज में नेत्रदान को लेकर फैली कुरीतियों के बारे में लोगों को जागरूक करने का काम भी समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है,अगर इस उद्देश्य के साथ हर कोई काम करेगा तभी हम अपने समाज और देश से अंधत्व को कम करने का काम कर सकते हैं। वहीं इस पुनीत कार्य से पूरा अग्रवाल परिवार भी अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है।


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