चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : धान की फसल में इन दिनों पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप को देखते हुए कृषि रक्षा विभाग ने किसानों को सतर्क किया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी आरके वर्मा ने बताया कि इस कीट की पहचान धान की पत्तियों के लंबाई में लिपटने और उन पर सफेद धारियां बनने से की जा सकती है। लिपटी पत्तियों के अंदर हल्के पीले या हरे रंग का छोटा कीट पाया जाता है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को फसल की सुरक्षा के लिए अनुशंसित रसायनों में से किसी एक का छिड़काव करने की सलाह दी है। बताया कि इनमें क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत, साइपरमेथ्रिन पांच प्रतिशत ईसी की 220 मिलीलीटर प्रति एकड़, इमामेक्टिन बेंजोएट पांच प्रतिशत एसजी
की 100 ग्राम प्रति एकड़, क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी की 250-280 मिलीलीटर प्रति एकड़ अथवा कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एसपी की 500 ग्राम प्रति एकड़ मात्रा शामिल है। बताया कि फसलों की सुरक्षा के लिए रसायन को 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। उन्होंने किसानों को कीटनाशी खरीदते समय विक्रेता से कैश मेमो अथवा रसीद अनिवार्य रूप से लेने की सलाह दी है। बताया कि रसीद पर कीटनाशी का नाम, बैच संख्या, विनिर्माण व अवसान तिथि तथा बिक्री मूल्य दर्ज होना चाहिए। बिना कैश मेमो या क्रेडिट मेमो के कीटनाशी बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कीटनाशी अधिनियम 1968 और नियमावली 1971 के तहत कार्रवाई की जाएगी।


No comments:
Post a Comment