कुलपति बोले : बुंदेलखंड प्राकृतिक खेती का उत्कृष्ट क्षेत्र बनेगा
गौआधारित खेती का आह्वान, कृषकों के लिए वरदान विश्वविद्यालय
बांदा, के एस दुबे । कृषक हितैसी तकनीकियो का विकास बड़े ही कठिन मेहनत से होता है। वैज्ञानिकों के द्वारा किये गये शोध व क्षेत्र पर प्रयोग के बाद ही तकनीकी का प्रसार किया जाता है। कृषि विश्वविद्यालय की ओर से प्राकृतिक खेती पर किये जा रहे शोध व प्रयोग सराहनीय है। इसका प्रसार कृषकों तक हो सके इसके लिये वैज्ञानिकों को आगे आना होगा। पूर्व में यहां की मृदा अनुउपजाऊ व जंगली बबूल से आच्छादित थी, जिसे निर्देशित कर सफाई करके खेती के कार्य में लिया जा रहा है। यहां पर उत्पादित हो रहे खजूर, ड्रैगन फूड, चिरौंजी के पेड़ कृषक भाइयों को देखना चाहिए और इसे अपनाना चाहिए। बुन्देलखण्ड में अन्ना प्रथा के समस्या के दृष्टिगत पशु चिकित्सा महाविद्यालय व पशु उपचार केन्द्र से पशु पालक लाभान्वित होंगे। जिससे कृषकों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आयेगा। आज हम कह सकते हैं कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र किसी भी मायने में पिछड़ा नहीं है। यह बात कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कृषि विवि में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले को संबोधित करते हुए कही।
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| किसान मेले में किसान को सम्मनित करते मंत्री सूर्यप्रताप शाही |
मुख्य अतिथि कृषि मंत्री ने विवि परिसर में कृषि विज्ञान केन्द्र में संचालित सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस प्राकृतिक, जैविक एवं शुुष्क खेती परियोजना के अन्तर्गत बकरी, मुर्गी फार्म के शेड व दुग्ध परीक्षण प्रयोगशाला का लोकार्पण किया। श्री शाही ने कहा कि यह विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से शिक्षा के साथ-साथ शोध और प्रसार पर अच्छा कार्य कर रहा है, इसके लिये कुलपति के साथ-साथ सभी बधाई के पात्र हैं। किसानों को एक समय अन्तराल पर बीज का बदलाव अधिक उत्पादन के लिए करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि व अध्यक्ष, गौ सेवा आयोग, उप्र श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि खेती को टिकाऊ तभी बनाया जा सकता है। किसानों से अनुरोध किया कि खेत पर मेढ़ व किसान खेत में तथा घर पर गौ माता अवश्य रखना चाहिए। आने वाली पीढ़ी को हम बीमार मृदा न देकर जायें। श्री गुप्ता ने गाय के महत्व एवं उससे प्राप्त गोमूत्र का कृषि में उपयोग को विस्तारपूर्वक बताया। राजेश सिंह सेंगर, सदस्य, प्रबन्ध परिषद्, बीयूएटी ने बताया कि यह विश्वविद्यालय कृषकों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां पर उत्पादित फसलों, फलों व सब्जियों को कृषक अवश्य देखें व वैज्ञानिकों से संवाद स्थापित करें। कुलपति प्रो. नरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि दो दिवसीय किसान मेला में बुन्देलखण्ड के कई जिलों के किसान गेहूँ, चना, मसूर व सरसों की
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| किसान मेले में मौजूद किसान |
उन्नतशील प्रजातियों के बीज क्रय किये हैं। विश्वविद्यालय निरन्तर कृषक हितैसी तकनीकियों के विकास में लगा है। प्रसार की अन्य विधियों से हमारे विश्वविद्यालय व कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक कृषकों तक पहुँच रहे हैं। यह विश्वविद्यालय किसानों के खेती में होने वाली समस्याओं के समाधान हेतु कार्य करता रहेगा। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार, प्रो. एनके वाजपेयी ने सभी आगन्तुकों का स्वागत किया। प्रो. बाजपेयी ने दो दिवसीय किसान मेले में आये विभिन्न जिले के कृषकों स्टाल धारकों के बारे में विस्तार से बताया। दो दिवसीय किसान मेले में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इसमें स्टॉल लगाने के लिए प्रथम पुरूस्कार आशियाना बायो एनर्जी, गुरूदेव ट्रैक्टर्स इफको को क्रमशः द्वितीय और तृतीय पुरूस्कार मिला। फसल प्रतियोगिता में देव सिंह, राठ, फल प्रतियोगिता में नन्द किशोर जैतपुरा व सब्जी प्रतियोगिता में राम सेवक पिथौराबाद ने प्रथम पुरूस्कार प्राप्त किया। पशु प्रतियोगिता में सीताराम को देशी गाय श्रेणी में, रामपाल को भैंस श्रेणी में, बलबीर को पड़िया श्रेणी में, रंजीत कुमार को वयस्क बकरी श्रेणी में, सतेन्द्र को मध्यम बकरी श्रेणी में तथा शुशील बाजपेयी को उत्कृष्ट भैंसा पालने के लिये प्रथम पुरूस्कार से सम्मानित किया गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के बाँदा एवं आस-पास जिलों के कृषकों द्वारा उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया गया। पुरूस्कार के रूप में कृषकों को सरसों और चना के बीज तथा पशु पालकों को पशुपालन से सम्बन्धित सामग्री भेंट की गयी। मेले में बुन्देलखण्ड के सभी 07 जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों के मार्गदर्शन में लगभग 7000 किसानों एवं युवाओं ने प्रतिभाग किया। आज भी मेले में तकनीकी सत्र का संचालन किया गया जिसमें वैज्ञानिकों ने विभिन्न विषयों पर संवाद किया। कार्यक्रम में धन्यवाद् ज्ञापन सह निदेशक प्रसार, डा. नरेन्द्र सिंह द्वारा एवं कार्यक्रम का संचालन डा. बीके गुप्ता, डा. धीरज मिश्रा, व डा. जगन्नाथ पाठक ने किया।



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