वृहद मानसिक स्वास्थ्य शिविर का हुआ आयोजन
बांदा, कृपाशंकर दुबे । राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आज गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरैनी में वृहद मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों को मानसिक रोगों के लक्षणों और इनसे बचाव के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया।
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| मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित शिविर में मौजूद लोग और चिकित्सक |
कार्यक्रम का आयोजन मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. एमसी पाल की अध्यक्षता में कराया गया व इसका उद्घाटन विधायक राजकरण कबीर द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि लोगों को मानसिक रोगों के प्रति अधिक जागरुक होने की आवश्यकता है। मनोरोग का सबसे आम रूप अवसाद है, जिससे अधिकतर लोग पीड़ित हैं। इसी कारण आत्महत्या की प्रवत्ति और घटनाओं में भी बढ़ावा देखने को मिल रहा है। सेवा विधिक प्राधिकरण से डा. जनार्दन त्रिपाठी ने किशोर आत्महत्या पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किशोर आत्महत्या को रोकने के लिए जरूरी है की माता-पिता उनसे दोस्तों जैसा व्यवहार रखें। शिविर में लगभग 150 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया जिसमें लगभग 75 लोग मनोरोग के लक्षणों से ग्रसित मिले। मनोरोग विशेषज्ञ डा. हरदयाल ने इन लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण व उपचार किया और क्लिनिकल साइकोलाजिस्ट डा. रिजवाना हाश्मी ने उनकी काउन्सलिंग की। मोनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिसर नरेन्द्र मिश्रा ने मानसिक रोगों से बचने के लिए जीवन-शैली में सुधार लाने और योग को अपनाने की सलाह दी। सीएचसी नरैनी प्रभारी चिकित्सक डा. बीएस राजपूत ने शिविर के आयोजन के लिए मानसिक स्वास्थ्य टीम का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सीआरए अनुपम त्रिपाठी, डा. एसपी सिंह, मो. शरीफ, अशोक कुमार, उदयभान आदि शामिल रहे।
मानसिक रोगों की जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार पर जोर
बांदा। नोडल अधिकारी डा. एमसी पाल ने जानकारी दी कि मानसिक रोगों के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए इस तरह के वृहद शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। बबेरू, बिसंडा और अतर्रा में भी इससे पहले ऐसे शिविर लगाए गये हैं। शिविर से पहले गांव-गांव जाकर प्रचार-प्रसार किया जाता है जिससे बड़ी संख्या में लोग इन शिविरों का लाभ ले सकें। शिविर में लोगों को मानसिक रोगों के प्रति जागरुक किया जाता है और साथ ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर उपचार और काउन्सलिंग की जाती है। पीएचसी, सीएचसी पर भी दवाएं रखवाई जाती हैं जिससे बाद में भी लोगों को दवाइयां मिल सकें। इसके अलावा हफ्ते में तीन दिन मानसिक स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में जाकर स्वास्थ्य परीक्षण और लोगों को जागरुक करती है। गंभीर रोगियों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। उन्होंने बताया कि मानसिक रोगों से दूर रहने का मूल मंत्र है कि हम जीवन से प्रेम करें। परिवार के सदस्यों में बातचीत होती रहनी चाहिए और अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों के साथ वक्त जरूर बिताएं।


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