आशाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी को ‘पद्मा एकादशी’, -पद्मनाभा एकादशी’ एवं ‘देवशयनी एकादशी ’ के नाम से जाना जाता है इस दिन चतुरमास का आरम्भ होता है। इस वर्श देवशयनी एकादशी 1 जुलाई को है। एकादशी 30 जून को सांयकाल 7ः49 से प्रारम्भ होकर 1 जुलाई को सांयकाल 5ः29 तक है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर-सागर में शयन करते है। ऐसा भी मत है कि भगवान विष्णु इस दिन से पाताल में राजा बलि के द्वार पर निवास करके कार्तिक शुक्ल एकादशी को लौटते हैं। इन चार माह में मांगालिक कार्य नहीं किये जाते है। चार माह बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रबोधिनी एकादशी को योग निद्रा से श्री हरि विश्णु जाग्रत होते है। इन चार माह में तपस्वी भ्रमण नहीं करते एक ही स्थान पर रहकर तपस्या करते है। देवशयनी एकादशी को भगवान् विश्णु के विग्रह को पंचामृत से स्नान कराकर धूप-दीप आदि से पूजन करना चाहिए, तदुपरान्त यथाशक्ति सोना-चाँदी आदि की शय्या के ऊपर बिस्तर बिछाकर और उस पर पीले रंग का रेशमी कपड़ा बिछाकर भगवान् विश्णु को शयन करवाना चाहिए
1 जुलाई से देवशयनी एकादशी से चातुर्मास मास प्रारम्भ होकर 25 नवम्बर तक रहेगा। इस बीच विवाह आदि कार्य नहीं होगें। 16 दिसम्बर से सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से खरमास लग जायेगा और मकर संक्रान्ति 14 जनवरी 2021 तक विवाह आदि कार्य नहीं होगें
वर्ष 2021 में गुरु 19 जनवरी से 15 फरवरी तक 27 दिन अस्त रहेंगे और शुक्र 17 फरवरी से 17 अप्रैल तक 60 दिन अस्त रहेंगे जिसके कारण 18 जनवरी को एक विवाह मुहूर्त एवं 15 फरवरी को एक विवाह मुहूर्त है मार्च 2021 में विवाह मुहूर्त नहीं हैै एवं 14 मार्च से 14 अप्रैल मीन खरमास रहेगा जिसके कारण विवाह आदि कार्य नहीं होगें 22 अप्रैल 2021 से विवाह मुहूर्त प्रारम्भ होगें वर्ष 2021 में 51 विवाह मुहूर्त है
इस वर्ष 2020 विवाह मुर्हूत-
नवम्बर’ 26, 29, 30
दिसम्बर’ 1 2 6, 7, 8 9 10, 11
- ज्योतिशाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ


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