टिकटॉक पर ब्रेक लग गया है। अब न तो छोटे-छोटे वीडियो गुदगुदाएंगे और न ही इनके लाइक्स से कोई स्टार बनेगा। क्योंकि चीन के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने चाइनीज एप पर रोक लगा दिया है। इसमें अधिकांश वो एप हैं, जो हर दूसरे कनपुरिये के मोबाइल पर न सिर्फ मिलेगा बल्कि रेगुलर यूज होता होगा।
कार्यालय संवाददाता:- कानपुर में अलग-अलग कंपनियों के करीब 30 लाख से अधिक मोबाइल फोन उपयोग हो रहे हैं। इसमें 50 फीसदी से अधिक मोबाइल चाइनीज कंपनियों के हैं। चाइनीज कंपनियां अपने मोबाइलों में अनेक चाइनीज एप को इनबिल्ट कर देती हैं। मतलब लोग चाहते हुए भी इन एप को डिलीट नहीं कर सकते। हालांकि अधिकांश लोग जानकारी के अभाव में धड़ल्ले से इन चाइनीज एप का प्रयोग करते हैं। यही हाल मोबाइल कंपनियों का भी है। शहर के 50 फीसदी से अधिक उपभोक्ता को पता ही नहीं है कि कौन सी मोबाइल कंपनी चाइनीज है। सरकार के इस आदेश के बाद बड़ी संख्या में शहरवासियों ने चाइनीज एप को अपने मोबाइल से डिलीट करना भी शुरू कर दिया है।
सरकार का चीन के खिलाफ यह बड़ा फैसला है। वर्तमान में ये एप अधिकांश मोबाइल में मिलेंगे। इसे हटाने पर कुछ दिक्कत तो होगी लेकिन यह जरूरी है। ये एप कई काम को आसान बना देते थे। मगर बैन करना जरूरी था। रेनू सिंह का मानना है कि हमारे मोबाइल में इतने सारे चाइनीज एप थे, इसकी जानकारी ही नहीं थी। सरकार ने बड़ा और अच्छा फैसला लिया है। हालांकि इन एप से बहुत राहत थी। जैसे एक ही मोबाइल पर पैरलेल स्पेस के जरिए दो अलग-अलग नंबर से व्हाट्सएप चला लेते थे। कुछ दिक्कत होगी तो इनके देशी विकल्प तलाशे जाएंगे। अंशिका अग्रहरि का कहना है कि चाइनीज एप को बंद करना वर्तमान परिस्थिति में जरूरी था। हमसे लाभ लेकर हमको ही चीन आंख दिखा रहा था। यह बात जरूर है कि इन चाइनीज एप ने हमारे मोबाइल में अहम स्थान बना रखा है। इसे हटाने पर कुछ दिक्कतें जरूर होंगी।
ये एप मिल जाएंगे हर दूसरे मोबाइल पर
-टिकटॉक
-यूसी ब्राउजर
-शेयरइट
-जेंडर
-पैरलेल स्पेस
-क्लैश ऑफ किंग
-क्लब फैक्ट्री
-हेलो
-लाइकी
-वीमेट
-विगो वीडियो
-एमआई वीडियो कॉल
-केक क्लीनर
-केम स्कैनर
-क्लीन मास्टर
-सेल्फी सिटी
कार्यालय संवाददाता:- कानपुर में अलग-अलग कंपनियों के करीब 30 लाख से अधिक मोबाइल फोन उपयोग हो रहे हैं। इसमें 50 फीसदी से अधिक मोबाइल चाइनीज कंपनियों के हैं। चाइनीज कंपनियां अपने मोबाइलों में अनेक चाइनीज एप को इनबिल्ट कर देती हैं। मतलब लोग चाहते हुए भी इन एप को डिलीट नहीं कर सकते। हालांकि अधिकांश लोग जानकारी के अभाव में धड़ल्ले से इन चाइनीज एप का प्रयोग करते हैं। यही हाल मोबाइल कंपनियों का भी है। शहर के 50 फीसदी से अधिक उपभोक्ता को पता ही नहीं है कि कौन सी मोबाइल कंपनी चाइनीज है। सरकार के इस आदेश के बाद बड़ी संख्या में शहरवासियों ने चाइनीज एप को अपने मोबाइल से डिलीट करना भी शुरू कर दिया है।
सरकार का चीन के खिलाफ यह बड़ा फैसला है। वर्तमान में ये एप अधिकांश मोबाइल में मिलेंगे। इसे हटाने पर कुछ दिक्कत तो होगी लेकिन यह जरूरी है। ये एप कई काम को आसान बना देते थे। मगर बैन करना जरूरी था। रेनू सिंह का मानना है कि हमारे मोबाइल में इतने सारे चाइनीज एप थे, इसकी जानकारी ही नहीं थी। सरकार ने बड़ा और अच्छा फैसला लिया है। हालांकि इन एप से बहुत राहत थी। जैसे एक ही मोबाइल पर पैरलेल स्पेस के जरिए दो अलग-अलग नंबर से व्हाट्सएप चला लेते थे। कुछ दिक्कत होगी तो इनके देशी विकल्प तलाशे जाएंगे। अंशिका अग्रहरि का कहना है कि चाइनीज एप को बंद करना वर्तमान परिस्थिति में जरूरी था। हमसे लाभ लेकर हमको ही चीन आंख दिखा रहा था। यह बात जरूर है कि इन चाइनीज एप ने हमारे मोबाइल में अहम स्थान बना रखा है। इसे हटाने पर कुछ दिक्कतें जरूर होंगी।
ये एप मिल जाएंगे हर दूसरे मोबाइल पर
-टिकटॉक
-यूसी ब्राउजर
-शेयरइट
-जेंडर
-पैरलेल स्पेस
-क्लैश ऑफ किंग
-क्लब फैक्ट्री
-हेलो
-लाइकी
-वीमेट
-विगो वीडियो
-एमआई वीडियो कॉल
-केक क्लीनर
-केम स्कैनर
-क्लीन मास्टर
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