जल ग्राम जखनी का मंत्र सूखा प्रभावित राज्यों में अपनाया जा रहा
एनआईसी के माध्यम से सीएम ने उमाशंकर के प्रयोग को सुना
बांदा, के एस दुबे । समुदाय के आधार पर परंपरागत तरीके से वर्षा बूंदों को खेतों में रोककर जखनी गांव ने जो मंत्र दिया, खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड। इस सफल प्रयोग को देखते हुए आज इस माडल की पूरे देश में सराहना हो रही है। सूखा प्रभावित राज्यों में इस परंपरागत विधि को अपनाया जा रहा है। जल शक्ति मंत्रालय ने ग्रामीण विकास मंत्रालय में तथा मनरेगा के माध्यम से सर्वाधिक मेड़बंदी की जा रही है। बुधवार को सूबे के मुख्यमंत्री ने भूजल सप्ताह के समापन पर चित्रकूटधाम मंडल मंडलायुक्त गौरव दयाल, जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल, अपर जिलाधिकारी संतोष बहादुर, मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र, जनता लघु सिंचाई विभाग के अभियंता की उपस्थिति में जल ग्राम जखनी के संयोजक उमाशंकर पांडे के प्रयोग को एनआईसी के माध्यम से मुख्यमंत्री ने सुना। इस
दौरान उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह, मुख्य सचिव आरके तिवार, अपर सचिव अवनीश अवस्थी, भूजल के निदेशक वीके उपाध्याय मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने समुदायिक प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि समुदाय का आधार पर परंपरागत तरीके से ही भू-जल संरक्षण का सही तरीका है। ज्ञात हो कि जखनी ग्राम के किसानों का समुदाय के आधार पर पिछले 20 वर्ष से पानी किसानी पलायन किसान खुद रोक रहे हैं। जिसको सरकार का पूरा समर्थन मिल रहा है और इस प्रयोग को देखने के लिए संपूर्ण भारत सहित बाहर से लोग आ रहे हैं। उमा शंकर पांडे ने इसका श्रेय गांव के किसानों युवाओं को दिया। श्री पांडे ने कहा कि जखनी के किसान नौजवान बधाई के पात्र हैं। एनआईसी की चर्चा के बाद चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त गौरव दयाल ने जखनी गांव का भ्रमण किया। वहां की मेड़बंदी तालाबों के जलस्तर को देखा। मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया जहां-जहां भू-जल संकट है। ऐसे इलाकों में बरसा भूजल को रोकने के लिए जखनी माडल लागू करें। गांव में भ्रमण के दौरान खंड विकास अधिकारी सिंचाई विभाग के अभियंता मौजूद थे।
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| भूजल सप्ताह के समापन में मौजूद आयुक्त गौरव दयाल और संयोजक उमाशंकर व अन्य |


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