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Thursday, July 23, 2020

दो क्रांति वीरो की जयंती --आजाद व गोखले को कभी नही भुलाया जा सकता

हमीरपुर, महेश अवस्थी । वर्णिता संस्था के माध्यम से विमर्श विविधा के अंतर्गत जरा याद करो कुर्बानी और जिनका देश ऋणी है ,के तहत आज दो महान विभूतियों तिलक और चंद्र शेखर आजाद की जयंतिया मनाई गई ।  संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर भवानी दीन ने कहा की तिलक अपने लगभग साढे छ दशकों के जीवन में देश के लिए जिए ,इनका  जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले हुआ था, उन्होंने 1895 मे कहा था कि स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, मैं इसे लेकर ही रहूंगा। साथ ही शिक्षा स्वदेशी और बहिष्कार की अवधारणा का भी तिलक ने समर्थन कियाथा, तिलक प्रमुख उग्रवादी नेता थे । उन्होंने युवाओं के लिए एक मंच तैयार किया, जिस के बैनर तले बहुत सारे युवा आजादी के संघर्ष के लिए तैयार हो गए ,तिलक के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। अंततः 1 अगस्त 1920 को तिलक का निधन हो गया तिलक आज भी प्रासंगिक हैं, इन्हें विस्मृत नहीं किया जा सकता है। इसीप्रकार चंद्रशेखर आजाद क्रांतिकारी आंदोलन के बहुत बड़े सूरमा थे । उनके लगभग ढाई दशकों के जीवन में सदैव उनकी रगों में देश प्रेम रमा रहा, उन्होंने तत्कालीन क्रांतिकारी युवाओं को क्रांति का उद्घोष कर यह कहा था कि हम आजाद रहे हैं, और आजाद रहेंगे ।ब्रिटिश साम्राज्य के पास कोई ऐसी गोली नहीं बनी है, जो
चंद्रशेखर आजाद को मार सके। आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को झाभुआ जिले के भावरा मे सीताराम तिवारी के घर  हुआ था।14 वर्ष की उम्र में बहिष्कार आंदोलन के अंतर्गत इन्हें 15 बेतो  की सजा मिली थी,  जिसे पूरी निडरता के साथ उन्होंने सहा था, शरीर रक्तरंजित हो गया था ,किंतु हिम्मत नहीं हारे थे, तभी से इनका नाम आजाद पड़ गया । ये काकोरी कांड से लेकर असेंबली बम कांड तक क्रांतिकारियों के साथ रहे, किंतु इन्हें पुलिस पकड़ नहीं सकी ।अंततः 27 फरवरी 1931 कोअल्फ्रेड पार्क इलाहाबाद में एक सशस्त्र संघर्ष में बहादुरी के साथ मुकाबला किया, घायल होने पर एक गोली शेष रहने पर खुद अपने मार ली।आजाद इस तरह से देश के लिए कुर्बान हो गये।,सही मायने में चन्द्र शेखर आजाद देश के लिए जिए और देश के लिए मरे ।इनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है।कार्यक्रम मे अवधेश कुमार गुप्त एडवोकेट, राजकुमार सोनी सर्राफ, राधा रमण गुप्त ,पिन्कू सिंह, कल्लू चौरसिया, गीता ओमर और लल्लन गुप्ता मौजूद रहे।

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