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Thursday, July 9, 2020

विद्युत विभाग की लापरवाही, बल्लियों के सहारे चल रही सप्लाई

फतेहपुर, शमशाद खान । प्रदेश की योगी सरकार द्वारा गांव-गांव बिजली पहुंचाने के दावे तो किये जाते हैं लेकिन शहर क्षेत्र की ही विद्युत व्यवस्था आज भी बल्लियों के सहारे चल रही है। इसे विद्युत विभाग की लापरवाही कहें या फिर भ्रष्टाचार का खेल। कागजी घोड़े दौड़ाकर विभाग के बड़े अधिकारी अपनी जेबें भरने का काम कर रहे हैं और इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। बल्लियांे के सहारे चल रही विद्युत व्यवस्था से लोगों की जिन्दगी जोखिम में बनी रहती है। बारिश के दिनों में यह व्यवस्था लोगों को मौत भी बांट सकती है लेकिन विभाग द्वारा इस पर कोई कारगर कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। जिससे लोगांे में नाराजगी व्याप्त है। 
बताते चलें कि नगर पालिका क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले कई वार्डों के मुहल्ले आज भी विद्युत लाइन के लिए तरस रहे हैं। शहर में कई नई बस्तियों का निर्माण हुआ है जिसमें आज तक विद्युत विभाग ने लाइन दौड़ाने का कार्य नहीं किया। इन बस्तियों में आबादी न होने की बात कहकर विभाग के उच्चाधिकारी अपना पल्ला झाड़ लेते हैं लेकिन शहर के कई मुहल्ले घनी आबादी में होने के बावजूद बल्लियों के सहारे विद्युत व्यवस्था पर टिके हैं। शहर के चैधराना, पनी, शान्तीनगर, बाकरगंज चांद खां का हांता, तुराबअली का पुरवा सहित कई ऐसी आबादी हैं जहां आज भी बल्लियों के सहारे विद्युत व्यवस्था चल रही है। रोड के बीचो-बीच बल्लियां गाड़कर उस पर तार दौड़ाने का
तुराबअली का पुरवा में बल्लियों पर टिकी विद्युत लाइनें।
काम स्थानीय लोगों द्वारा किया गया है। लोगों से जब इस बाबत बात की गयी तो उनका कहना रहा कि पचास मीटर पर विद्युत पोल देने का दावा विभाग द्वारा किया जाता है लेकिन यहां ऐसा नहीं है। दो सौ से चार सौ मीटर तक तार दौड़कर वह अपने घरों को रोशन कर रहे हैं। विभाग द्वारा सिर्फ वसूली की जाती है सुविधाएं देने में विभाग बेहद पीछे है। बल्लियों के सहारे टिकी विद्युत व्यवस्था बारिश के दिनों में जानलेवा से कम नही है। कई मुहल्लों मे बल्लियों के ऊपर तार रखे हुए हैं जो बाइक सवार के सिर को भी छूने का काम करते हैं। अगर बारिश के दिनों में किसी तरह का हादसा हो गया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। उच्चाधिकारियों की यह मनमानी साफ जाहिर करती है कि यहां सिर्फ भ्रष्टाचार हावी है। कागजी घोड़े दौड़ाकर पोल गाड़ने का काम किया जाता है जबकि हकीकत कुछ और ही है। इन पोलों का पैसा उच्चाधिकारी डकारने का काम करके सरकार की मंशा को तार-तार कर रहे हैं। 

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