देवेश प्रताप सिंह राठौर
( वरिष्ठ पत्रकार)
....... कानपुर 3 जुलाई को 8 पुलिस वालों की हत्या का मुजरिम विकास दुबे आज उज्जैन में महाकाल मंदिर में गिरफ्तार किया गया जिस तरह गिरफ्तारी हुई है उस तरह लगता है किसी राजनीतिक दल का हाथ अवश्य है। क्योंकि मीडिया के लोग वहां पर पहुंच चुके थे यह सब पूर्व सोची-समझी नीति के तहत महाकाल मंदिर उज्जैन मै नाटकीय ढंग से गिरफ्तार हुआ और चिल्लाया कि मैं ही हूं विकास दुबे मैं हूं कानपुर का विकास दुबे यह कहकर वहां के लगे सुरक्षा गार्डों ने महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था मैं लगे सिपाहियोंने विकास दुबे को अरेस्ट किया उसके बाद वरिष्ठ कार्यालय पुलिस विभाग को सूचना दी गई, उत्तर प्रदेश के कानपुर में दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिसकर्मियों को शहीद करने वाले हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का जघन्य आपराधिक इतिहास रहा है. बचपन से ही वह अपराध की दुनिया में अपना नाम बनाना चाहता था. पहले उसने गैंग बनाया और लूट, डकैती, हत्याएं करने लगा. 19 साल पहले उसने थाने में घुसकर एक दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की हत्या की और इसके बाद उसने राजनीति में एंट्री लेने की कोशिश की थी. लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. विकास कई बार गिरफ्तार हुआ, एक बार तो लखनऊ में एसटीएफ ने उसे दबोचा विकास दुबे 2001 में संतोष शुक्ला की मृत्यु थाने में जाकर गोलियों से भून डाला था उस समय मनोनीत मंत्री का दर्जा प्राप्त संतोष शुक्ला को जिस तरह मारा गया और जिस तरह यह कॉलेज के प्रधानाचार्य को विकास दुबे ने मारा और उसके आतंक पर आतंक चलते रहे लेकिन किसी ने इसकी खबर नहीं ली 3 जुलाई को जो उसने किया है पुलिस वालों की जिस तरह हत्या हुई है यह बहुत ही उस को बढ़ावा देने वाले लोगों के द्वारा राजनीतिक संरक्षण अवश्य प्राप्त रहा है। जिसने इस तरह की वारदात की सरकार के साथ सीधा मोर्चा लिया और 8 पुलिस वालों को शहीद होना पड़ा बड़े दुख की बात है आतंकी पहले नेता पालते हैं पुलिस संरक्षण देती है जब वही लोग उनके लिए घातक बन जाते हैं तो जो विकास दुबे जैसे लोग रूप बनकर निकलते हैं,और भी नाम है जैसे मुख्तार अंसारी एवं अतीक अहमद जैसे लोग हत्याओं घटनाओं के कई मुकदमे चल रहे हैं। आतंक दो प्रकार के होते हैं एक बाहरी आतंकवाद जो पाकिस्तान फैला रहा है उसे हमारे वीर सेना मार रही है। और जो अंदर आतंक फैला रहे हैं हत्या लूट डकैती उघाई अन्य संगीन अपराधों से लिप्त हैंजिन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है उन्हें कैसे उनकी सजा कौन दे, जब सरकार और राजनीतिक दल ऐसे लोगों को ना पले तो इस तरह की घटनाएं ना हो इसको रोका जा सकता है।


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