पांडेय पुरवा समेत कई मजरों में आवागमन बदहाल,
ग्रामीणों ने सांसद निधि से आरसीसी सड़क की उठाई मांग
बांदा, के एस दुबे । लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीण इलाकों में बदहाल संपर्क मार्गों की तस्वीर सामने ला दी है। ग्राम तुर्रा, तहसील अतर्रा, जिला बांदा के साथ आसपास के पांडेय पुरवा, रामफल यादव का पुरवा, बच्चा पुरवा और शिवधनी यादव का पुरवा में बारिश के बाद रास्ते दलदल और जलभराव में तब्दील हो गए हैं। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को घुटनों तक भरे कीचड़ और पानी के बीच से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। तस्वीर में एक ग्रामीण जूते हाथ में लेकर घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ से होकर रास्ता पार करता दिखाई दे रहा है। यह तस्वीर क्षेत्र में बारिश के दौरान पैदा होने वाली मुश्किलों को साफ बयां कर रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक इन रास्तों से बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों, किसानों, मजदूरों और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बारिश के दिनों में रास्ते कीचड़ में बदल जाने से पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है। जरूरत के समय मरीजों को अस्पताल या मुख्य सड़क तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।
करीब एक हजार आबादी का मुख्य रास्ता खराब
मामले को लेकर ग्रामीण अभिलाष यादव ने लोकसभा क्षेत्र बांदा-चित्रकूट के सांसद को प्रार्थना पत्र देकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि ग्राम तुर्रा में सुंदर यादव के घर से समलिया यादव के पुरवा तक कच्चा रास्ता है, जिसकी स्थिति बरसात के समय बेहद खराब हो जाती है। पत्र के अनुसार इसी रास्ते से गांव की लगभग 1000 आबादी का मुख्य आवागमन होता है और बारिश में लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण ने सांसद से उक्त मार्ग का सांसद निधि से आरसीसी सड़क के रूप में निर्माण कराने की मांग की है।
शिकायतों के बावजूद नहीं निकला स्थायी समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग की समस्या को लेकर कई बार तहसील दिवस, उपजिलाधिकारी अतर्रा, जिलाधिकारी बांदा, मुख्यमंत्री और सांसद तक अपनी समस्या पहुंचाई जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक स्थायी सड़क निर्माण नहीं होने से बरसात में हर साल यही परेशानी दोहराई जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मौके का स्थलीय निरीक्षण कराकर जल निकासी की व्यवस्था के साथ आरसीसी सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बरसात में गांव के लोगों को दलदल और जलभराव से होकर न गुजरना पड़े। ग्रामीणों का सवाल है कि जब एक हजार के करीब आबादी वाले गांव का मुख्य रास्ता बरसात में पैदल चलने लायक भी नहीं बचता, तो आखिर ग्रामीणों की यह समस्या कब दूर होगी?


No comments:
Post a Comment