प्रशासन से बाढ़ पीड़ितों को सहायता मुहैया कराए जाने की मांग
फ़तेहपुर, शमशाद खान । लगतार हो रही वर्षा और नंदियो में पानी छोड़े जाने के बाद यमुना नदी उफान पर है जिसके कारण आयी बाढ़ से यमुना कटरी का कई गाँवों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। कई क्षेत्रों में जहाँ यमुना नदी का पानी सड़को के ऊपर से बह रहा है नंदियो कि कटान से किसानों के खेत व मकान नंदियो में समा चुके है। अयाहः शाह विधानसभा के तहत आने वाले कोर्रा कंनक के मजरे हडाई की हालत बद से बदतर है। केन नदी का पानी छोड़े जाने के बाद यमुना नदी का जलस्तर कई गुना तक बढ़ गया है जिससे नदी
का पानी मुत्तौर ललौली मार्ग के ऊपर से बहने के साथ ही यमुना पट्टी के कई ग़ांव कोर्रकनक,मैनाही का डेरा, भूप का डेरा, धोभिया,दड़िहार, घनश्याम का डेरा, आदि गाँवों में बाढ़ से प्रभावित है। जबकि जलस्तर बढ़ने से मड़ोली, दसौली चोभेरा डेरा, नरौली गढ़ा, भुरवल, असहर, पिपरहा डेरा, विकौरा, मझगंवा, समेत अन्य गाँवो में बाढ़ का भीषण खतरा बना हुआ है। बुधवार को समाजसेवी व दीनदयाल उपाध्याय सेवा समिति के प्रदेश सचिव धर्मेन्द्र सिंह जनसेवक व अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगो की मदद को राहत सामग्री आदि लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि नंदियो की कटान के कारण अब तक उक्त क्षेत्र के लाहभग 56 मजरों की लगभग 13 हज़ार बीघे भूमि पड़ोसी जनपद बाँदा की ओर जा चुकी है कई बार जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अफसरों के समक्ष मांग किये जाने के बाद भी आजतक किसानों की भूमि को वापस दिलाने की कोई पहल नही की गयी। उन्होंने कहा कि बाढ़ से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित है। बाढ़ के कारण किसानों के खेत पानी में समा चुके है जबकि कटान के कारण लोगो का घर नदी के अंदर समा चुका है। उन्होंने प्रशासन से बाढ़ के कहर से बेघर हो चुके लोगो को फौरी राहत दिलाये जाने के साथ ही रहने के लिए छत मुहैय्या कराये जाने की मांग किया।


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