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Tuesday, September 24, 2019

मुकुट पूजा के साथ प्राचीन रामलीला का हुआ शुभारंभ

173 वर्ष पुरानी रामलीला का मंचन मुकुट पूजा के साथ हुआ प्रारम्भ

बबेरू, कृपाशंकर दुबे । रामलीला की स्थापना स्वामी बीरदास बाबा ने 1846 में की थी। उन्ही की असीम अनुकम्पा से रामलीला का मंचन होता चला आ रहा है। देश-प्रदेश के नामी गिरामी कलाकारों के मंचन से दर्शक भावविभोर हो जाते रहे। राम-लक्ष्मण की भूमिका बाल कलाकर अदा करते चले आ रहे हैं। तीन दशक पहले रावण का अभिनय करने वाले को आज तक लोग भूले नही है। 24 सितम्बर से मुकुट पूजा के साथ रामलीला प्रारम्भ हो गई है।
विशालकाय रावण की मूर्ति तैयार
बबेरू की रामलीला 173 वर्ष पहले स्वामी बीरदास बाबा ने प्रारम्भ की थी। सन 1846 में रामलीला की स्थापना स्वामी जी ने किया था। उन्ही की अनुकम्पा से रामलीला का मंचन होता चला आ रहा है। उनके ब्रहम्लीन होने के बाद समिति के माध्यम से रामलीला का आयोजन हो रहा है। स्थानीय कलाकरों के द्वारा रामलीला का मंचन होता रहा। राम लक्ष्मण सीता भरत शत्रुधन की भूमिका बाल कलाकार निभाते चले आ रहे है। मौजूदा समय में समिति के प्रबन्धक का कार्य डा. बुद्वप्रकाश अग्निहोत्री देख रहे है। जिन्होने अथक प्रयास से रावणा मैदान में सहयोग प्राप्त कर विशाल काय रावण की मूर्ति का निर्माण कराया और रावणा मैदान में मिट्टी की पुराई एवं जमीन को सुरक्षित रखने के लिए विधायक निधि से नाली एवं सीसी रोड का निर्माण कराया। रामलीला मंचन का भव्य पंडाल अद्र्वनिर्मित है। पंडाल की छत का निर्माण रामलीला होने के बाद प्रारम्भ होगी। प्रबन्धक ने जानकारी देते हुए बताया कि रामलीला मैदान सहित रावणा मैदान में 35 लाख के करीब प्रतिनिधियों से धन स्वीकृत कराकर कार्य शुरू कराया है। लंका भवन का निर्माण पिछले कार्यकाल में कराया था। समिति का भविष्य में  अशोक वटिका सहित कार्य कराने की योजना है। इस वर्ष देश प्रदेश के नामी कलाकारों से रामलीला का मंचन होगा।

रावण के पात्र चन्द्रिका महाराज को आज तक नही भूले
बबेरू। रामलीला मंचन के लिए राम लक्ष्मण बाल कलाकरों को तैयार किए जाते है। जो रामचरित मानस के आधार पर मंचन करते है। दर्शक बाल कलाकारों के द्वारा मंचन को देख कर भावविभोर हो जाते। जो एक बार बबेरू की रामलीला को देख लेता है। वह बार बार रामलीला को देखने अवश्य आता है। तीन दशक पहले रावण की भूमिका चन्द्रिका महाराज एवं हनुमान की भूमिका बल्देव प्रसाद निभाते थे। उनकी कला को देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। दोनो कलाकारों के निधन के बाद भी लोग आज तक नही भूले है।

आकर्षण के कार्यक्रम
बबेरू। रामलीला का मुख्य आकर्षण बाणासुर रावण संवाद, परसुराम लक्ष्मण संवाद, सीताहरण, लंका दहन, राम रावण युद्व, दशहरा मेला व एकादशी को विशाल दंगल का आयोजन है। जिसमें हजारों की संख्या मंें लोग उपास्थित होते है। रामलीला 24 सितम्बर से मुकुट पूजन से प्रारम्भ हो गई है।

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