सरकार का गड्ढामुक्त अभियान हवा-हवाई
फतेहपुर, शमशाद खान । ढाई साल पहले प्रदेश की सत्ता संभालने वाली योगी सरकार ने प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का जो ऐलान किया था वह हवा-हवाई ही साबित हुआ है। जबकि वास्तविकता यह है कि पिछली सरकारों के कार्यकाल से वर्तमान सरकार के दौर में सड़कें और अधिक बदहाल हो चुकी हैं। जबकि जिले से एक केन्द्रीय मंत्री व प्रदेश सरकार में दो मंत्रियों के अलावा सभी विधायक सत्ता पक्ष के हैं। 50 नम्बर रेलवे गेट को बांदा सागर मार्ग के नाम से जाना जाता है। इस पुल वाले मार्ग की सड़कों का डामर खत्म हो चुका है। लोगों का कहना है कि अब सड़कों पर गड्ढे नहीं है बल्कि गड्ढे के अंदर सड़कें हैं। यही हाल शहर के अधिकांश मार्गों का है।
| बांदा-सागर मार्ग की जर्जर हालत का दृश्य। |
बताते चलें कि सत्ता संभालते ही योगी सरकार ने जून 2017 तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का ऐलान किया था। लगभग ढाई वर्ष बीतने के बावजूद भी प्रदेश की बात करना यहां पर उचित नही है। अपने शहर की सड़कों को देखकर भाजपा सरकार के दावे खोखले ही साबित हुए हैं। शहर के अधिकांश मार्गों पथरकटा चैराहा से कोतवाली रोड, वर्मा चैराहा से चैक स्टेशन रोड, पथरकटा से स्टेशन रोड, पथरकटा से सदर अस्ताल रोड, शादीपुर से गैस गोदाम रोड के अलावा बांदा सागर मार्ग 50 नम्बर ओवर ब्रिज के नीचे की सड़कें बदहाली का जीता-जागता उदाहरण हैं। इन सभी सड़कों से डामर गायब हो चुका है। सिर्फ जलभराव और कीचड़ इन मार्गो की पहचान बन गयी है। टूटी फूटी सड़कों पर जहां दुर्घटनाएं तेजी से बढ रही हैं वहीं गड्ढायुक्त सड़कों पर जलभराव के चलते आये दिन राहगीर भी चुटहिल हो रहे हैं। हल्की बारिश हो जाने पर जर्जर मार्गों पर भरे लबालब पानी में सर्वाधिक दिक्कतें स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही हैं। अक्सर स्कूली बच्चों की साइकिल पर टंगे बैग भी गड्ढों में फंसकर भीग जाते हैं। जिसके चलते उनकी पढ़ाई में भी खलल पड़ता है। शहर की खस्ताहाल सडकों का मुद्दा मंगलवार को जनपद आगमन पर आये प्रदेश के आबकारी/जिले के प्रभारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री के समक्ष भी प्रमुखता से उठाया गया था। इस पर जिलाधिकारी संजीव सिंह ने खस्ताहाल सड़कों को स्वीकारते हुए इनके निर्माण व मरम्मत का आश्वासन दिया है।

No comments:
Post a Comment